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खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था पर सियासत तेज, विपक्ष ने उठाए सवाल

मध्य प्रदेश में खाद वितरण की नई ई-टोकन व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने सरकार पर किसानों की जरूरतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि इस प्रणाली से कई किसानों को पर्याप्त खाद नहीं मिल पाएगी, खासकर साझा खातों और बटाई पर खेती करने वालों को परेशानी हो सकती है। साथ ही सोयाबीन किसानों को यूरिया वितरण संबंधी नियमों पर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष ने पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।

By: Nivedita 
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खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था पर सियासत तेज, विपक्ष ने उठाए सवाल

मध्य प्रदेश में किसानों को खाद वितरण के लिए लागू की गई नई ई-टोकन व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया है।

किसानों की जरूरतों की अनदेखी का आरोप

विपक्ष का कहना है कि हर किसान की फसल और भूमि की आवश्यकता अलग होती है, लेकिन ई-टोकन प्रणाली के तहत खाद वितरण को निर्धारित सीमा में बांध दिया गया है। उनका आरोप है कि इससे किसानों को उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल पाएगी।

सोयाबीन किसानों को लेकर भी जताई चिंता

विपक्षी नेताओं ने सोयाबीन उत्पादक किसानों को यूरिया वितरण से संबंधित नियमों पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस प्रकार की पाबंदियों से किसानों की फसल प्रभावित हो सकती है और भविष्य में बीमा तथा मुआवजा संबंधी मामलों में भी परेशानी खड़ी हो सकती है।

साझा खाते और बटाईदार किसानों की समस्या

नई व्यवस्था को लेकर साझा खातों तथा बटाई पर खेती करने वाले किसानों की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष का आरोप है कि तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कई पात्र किसान खाद प्राप्त करने से वंचित रह सकते हैं।

पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग

विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि ई-टोकन प्रणाली पर पुनर्विचार किया जाए और पहले की तरह सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को सीधे खाद उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

सरकार के रुख पर टिकी निगाहें

खाद वितरण व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बाद अब किसानों और राजनीतिक दलों की नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि किसानों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।

 

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