मध्य प्रदेश विधानसभा में आज समृद्ध और विकसित मध्य प्रदेश के विज़न को लेकर एकदिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया, लेकिन सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक घमासान तेज हो गया। विपक्षी कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए सदन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे बैठकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। आरोप लगाया गया कि सरकार विकास के दावों के विपरीत जनता को मूल सुविधाओं से वंचित छोड़ रही है।
कांग्रेस का कहना है कि- किसानों को खाद-बीज समय पर उपलब्ध नहीं हो रहा, युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं, महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं।कांग्रेस विधायक बोले- “समृद्धि का दावा करने से पहले किसानों, युवाओं और महिलाओं से पूछिए कि प्रदेश कितना बदला है। सरकार वादे करती है, लेकिन पूरा नहीं करती।”
कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलने को महात्मा गांधी के विचारों और पहचान के अपमान के रूप में बताया। कांग्रेस ने कहा- “मनरेगा महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर आधारित गरीबों की योजना है। इसका नाम बदलना गांधी जी की विरासत को कमजोर करने की कोशिश है।”
कांग्रेस के तीखे हमले पर भाजपा भी पीछे नहीं हटी। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा- “महात्मा गांधी का सबसे ज्यादा सम्मान यदि कोई करता है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं। कांग्रेस बताए कि उसे राम नाम से दिक्कत क्यों है?” कांग्रेस विकास पर बहस से भाग रही है और जनता को गुमराह कर रही है।
समृद्ध मध्य प्रदेश का एजेंडा तय करने से पहले ही सत्र राजनीतिक खिंचतान का मंच बन गया। एक ओर कांग्रेस मंहगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार को घेर रही है, वहीं भाजपा विपक्ष पर मुद्दों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगा रही है। अब नजर इस पर है कि सदन के भीतर होने वाली चर्चा में कौन से मुद्दे हावी होते हैं और विशेष सत्र से राज्य की विकास दिशा के लिए क्या ठोस निर्णय निकलता है।