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वैक्सीन के नाम पर गांव छोड़ शहरों की ओर जा रहे लोग, घरों में लटके ताले, गलियों में पसरा सन्नाटा…

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : देश में जारी कोरोना संकट के बीच सरकार लगातार वैक्सीनेशन करा रही है, जिससे इस महामारी पर रोक लग सकें। वहीं कुछ लोग इस वैक्सीन को लेकर ऐसी अफवाहें उड़ा चुके है, जो गांव के लोगों के दिलों में घर कर गया है। जिससे उन्हें इस वैक्सीन से डर सताने लगा है और ग्रामीण वैक्सीन का नाम सुनकर ही भाग रहे हैं। बीते दिनों कलेक्टर खुद गांवों में गए थे, इस दौरान उनकी एक महिला से भिड़त हो गई थीं। अब डर से लोग गांव छोड़कर जा रहे हैं। वैक्सीन के डर से गांवों में ताले लटके हुए हैं। गलियों में सन्नाटा है।

गांवों में इस विरानगी के देखकर लोग हैरान हैं। टीकमगढ़ जिले के चोपरा गांव में सन्नाटा है। यह गांव परा पंचायत में आता है। गांव से 240 परिवार महानगरों की ओर पलायन कर गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कोविड-19 वैक्सीन के कारण क्षेत्र में मौतें हो रही हैं और इसके साथ ही लोग नपुंसक बन रहे हैं। लोगों में बैठे इस तरह की अफवाह ने उन्हें महानगरों की ओर जाने के लिए मजबूर कर दिया है।

लोग बताते हैं कि वैक्सीन के भय से चोपरा गांव से करीब 80 फीसदी आबादी पलायन कर गई है। गांव में सिर्फ बुजुर्ग पुरुष और महिलाएं बचे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि उनके गांव में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग जबरन लोगों को परेशान कर रही है, जिससे लोग पलायन कर के महानगरों की ओर चले गए हैं। इस गांव में अधिकांश रैकवार समाज के लोग रहते हैं, घरों में लटकते ताले और पसरा सन्नाटा इस बात की गवाही दे रहा है कि इस गांव में कोविड-19 वैक्सीन का कितना दहशत है।

गांव के रहने वाले राम लखन कहते हैं कि मेरे गांव में कोविड-19 वैक्सीन लेने के कारण 4 लोगों की मौत हो गई है, जिस कारण से लोग पलायन कर गए हैं। गांव की रहने वाली 60 वर्षीय महिला पार्वती कहती हैं कि कोरोना वैक्सीन के इंजेक्शन लगने के बाद लोगों की मौत हो रही है, जिस वजह से हमारे गांव के 240 परिवारों के सदस्य अपने-अपने घरों में ताले लगाकर के महानगरों में काम करने के लिए निकल गए हैं।

टीकमगढ़ जिले के जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ पीके माहोर कहते हैं कि बड़ागांव ब्लॉक के अंतर्गत 78 ग्राम पंचायतें आती हैं, जहां वैक्सीनेशन का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में लोगों में उत्सुकता थी और करीब कोविड-19 वैक्सीन का पहला डोज 15000 लोगों ने लिया लेकिन सेकंड डोज आते-आते इसमें लगातार गिरावट हो गई। 15 मई तक मात्र 964 लोगों ने कोविड-19 का सेकंड डोज लिया है। निश्चित ही ग्रामीणों के अंदर दहशत और अफवाह के चलते अब ग्रामीण वैक्सीन का दूसरा डोज लेने नहीं आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मात्र 6 परसेंट लोगों ने ही कोविड-19 का सेकंड डोज लिया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की चिंता जगजाहिर है। लोगों के अंदर बैठे भ्रम को दूर करने के लिए लगातार स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग मिलकर के लोगों को समझाइश दे रही है, लेकिन बड़ागांव ब्लॉक में लोग सेकंड डोज लेने के लिए नहीं आ रहे हैं। अगर उन लोगों को समझाने का प्रयास किया जाता है तो ग्रामीण मारने पर उतारू हो जाते हैं।

अब सवाल यह उठता है कि ऐसे में वैक्सीनेशन कैसे कंप्लीट होगी और कोरोना कैसे खत्म होगा। इसे लेकर सरकार को जल्द से जल्द ऐसे ठोस कदम उठाना चाहिए, जिससे ग्रामीणों के दिमाग से कोरोना वैक्सीन का भय खत्म हो सकें।

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