कौन कहता है कि आकाश में सुराख़ नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। इस बात को उत्तर प्रदेश के जालौन जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा मूर्त रूप देने के काम में लगे हैं।
वो कैदियों के बीच वह इस तरह से सुधार प्रक्रिया चला रहे हैं कि शातिर अपराधियों के जीवन में भी सकारात्मक बदलावों की बयार बहने लगी है।
अपने अच्छे कार्यों से हमेशा चर्चा में रहने वाले जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में आ गए है। दरअसल जेल की हालत सुधारने के बाद अब वो कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने ले लग गए है।
3 साल के अंदर जो उरई कारागार के लिए जो उन्होंने किया है वो काबिले तारीफ़ है। उनकी दूर दृष्टि इतनी है कि अब उन्होंने जेल में जो अल्पवस्य्क कैदी है उनके लिए शिक्षा के इंतज़ाम किए है।
सीताराम शर्मा जी इस बारे में कहते है कि अपराध से घृणा हो अपराधी से नहीं, और इसी विचारधारा के साथ बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था कर रहे है ताकि आने वाले समय में उनका अच्छा जीवन हो सके।
इन बच्चों को पढ़ाने के लिए बाकायदा शिक्षक आ रहे है ताकि उनका भविष्य सुधर सके। इन सबके बारे में जेल अधीक्षक का कहना है कि जाने अनजाने कोई अपराध करके उनके यहां आता है तो उनकी कोशिश रहती है कि उन्हें अच्छी सोच के साथ रखा जाए।
जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा जो कर रहे है वो वाकई में एक उदाहरण है और आरएनआई की पूरी टीम उनके इन प्रयासों की सराहना और प्रशंसा करती है।