मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को विजय दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के वीर जवानों के अतुलनीय शौर्य, साहस और बलिदान को नमन किया। उन्होंने 1971 के युद्ध में शहीद हुए जवानों के प्रति गहरी श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा कि यह दिवस हमारे राष्ट्रीय गौरव और सैन्य सामर्थ्य का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 16 दिसंबर 1971 भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है, जब भारतीय सेना के अदम्य पराक्रम और रणनीतिक कौशल के सामने पाकिस्तानी सेना को आत्मसमर्पण करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल सैन्य सफलता नहीं थी, बल्कि राष्ट्र की एकता, साहस और अनुशासन की उत्कृष्ट मिसाल है।
डॉ. यादव ने कहा-“विजय दिवस हमें उन वीर जवानों की याद दिलाता है जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। संपूर्ण राष्ट्र उनके शौर्य पर गर्व करता है।”
मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि 1971 के युद्ध का परिणाम न केवल भारत की ऐतिहासिक जीत थी, बल्कि इससे बांग्लादेश की स्वतंत्रता का मार्ग भी प्रशस्त हुआ। पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के साथ यह युद्ध समाप्त हुआ और दुनिया ने भारतीय सेना की वीरता का लोहा माना। उन्होंने कहा कि हर वर्ष 16 दिसंबर को विजय दिवस मनाने का उद्देश्य शहीदों के शौर्य को याद करना और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेना है।
डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र सदैव अपने उन वीर सपूतों का ऋणी रहेगा जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि नए भारत के निर्माण में सेना के अनुशासन, समर्पण और त्याग की प्रेरणा हमेशा मार्गदर्शक बनी रहेगी।