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नोएडा अथॉरिटी के दो कानूनी सलाहकारों पर मुकदमा, 12 करोड़ का घोटाला

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नोएडा: कोरोना महामारी के कहर से उत्तर प्रदेश पूरी तरह उभरा भी नहीं है, दूसरी ओर अधिकारियों के एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। नोएडा अथॉरिटी में जमीन अधिग्रहण से जुड़े एक घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। नोएडा प्राधिकरण के लॉ ऑफिसर ने प्राधिकरण कार्यालय में तैनात विधि सलाहकार दिनेश कुमार सिंह और पूर्व सहायक विधिक अधिकारी वीरेंद्र सिंह नागर समेत तीन लोगों के खिलाफ नोएडा के सेक्टर 20 थाने में धोखाधड़ी और आपराधिक षडयंत्र का मुकदमा दर्ज करवाया है।

आपको बता दें कि इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन लोगों ने गेझा गांव की एक जमीन के अधिग्रहण को लेकर फर्जीवाड़ा किया है। इस फर्जीवाड़े से प्राधिकरण को 12 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा है। FIR दर्ज होने के बाद इस मामले की जांच शुरू हो गयी है। नोएडा प्राधिकरण के ऑफिसर ने पुलिस में शिकायत दी है कि 1982 में ग्राम की जातिपताबाद में रहने वाले कुंदन की जमीन को अधिग्रहण किया गया था जिसके बाद उसने कोर्ट में अथॉरिटी के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी।

साल 1993 में जिला अदालत ने इस मामले का निस्तारण कर दिया था और फैसला कुंदन के खिलाफ किया था. इस फैसले के खिलाफ कुंदन की बेटी रामवती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया था। घोटाले का खेल नोएडा प्राधिकरण के अफसरों ने यहीं से शुरू किया।

अपील हाईकोर्ट में खारिज होने के बाद भी आरोप है कि रामवती ने मामले को हाईकोर्ट में लंबित बताकर प्राधिकरण के सीईओ को समझौते के लिए आवेदन पत्र दिया था। प्राधिकरण के विधिक विभाग में तैनात दोनों ही अफसरों ने रामवती के साथ मिलीभगत के तहत जांच करके इस मामले को कोर्ट में लंबित बताया था। दिनेश कुमार सिंह और उसके साथियों ने मिलकर रामवती की याचिका को लंबित बता कर उसे बचा हुआ मुआवजा दिलवा दिया जबकि यह याचिका को हाईकोर्ट में खारिज हो चुकी थी।

इतने बड़े घोटाले में प्राधिकरण के विधिक अधिकारी सुशील भाटी की तहरीर पर विधि सलाहकार दिनेश कुमार सिंह, तत्कालीन सहायक विधिक अधिकारी वीरेंद्र सिंह नागर और रामवती के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले में जांच शुरू हो गई है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों पर अक्सर भ्रष्टाचार के इल्जाम लगते रहे हैं। कई मामलों में अधिकारियों को जेल भी भेजा गया है और कई ऐसे केस हैं जो अभी सीबीआई, ईडी और ओ डब्ल्यू में लंबित हैं।

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