जितेंद्र शर्मा की कलम से { Editor In Chief }
कहते है कि ईश्वर खुद ज़मीन पर नहीं आ सकता था तो उसने मां बनायीं और हमारे पुराणों में मां को ईश्वर का ही दर्जा मिला हुआ है।
मां को प्रथम गुरु भी कहा जाता है क्योंकि अपने पुत्र को पहला अक्षर मां ही सिखाती है।
मैं मीडिया में 26 वर्षों से कार्यरत हूँ और बरखा दत्त जी की रिपोर्टिंग का जीवन में पहली बार कायल हुआ हूँ।
बरखा दत्त जी ने एक मां के लिए जो किया है उसे देखकर मैं भाव विभोर हो गया हूँ और अंत:करण की गहराइयों से उनका धन्यवाद करना चाहता हूं।
एक संस्था का प्रमुख होने के नाते मैं मानता हूं कि इंसान जो भी बनता है अपनी मेहनत से बनता है। एक कड़ा संघर्ष करने के बाद व्यक्ति कही पहुँचता है और कुछ बनता है।
मैंने भी जीवन में 26 साल नौकरी की और आज एक संस्था का प्रमुख बना हूं। मेरा मत है कि बिना मां पिता का आशीर्वाद के कोई जीवन में आगे नहीं बढ़ सकता है।
एक इंसान को घमंडी नहीं होना चाहिए और व्यक्ति को हर उस इंसान का शुक्रिया होना चाहिए जिसने उसे जीवन में आगे बढ़ाया।
ख़ास तौर से मां, पिता और गुरु जन। ये 3 व्यक्ति आपके जीवन में ऐसे है जिनका चरणों में सदैव आपका सिर झुकना चाहिए।
कितना कष्ट सहकर मां बच्चे को जन्म देती है और बाद में उसे पालती है। अपने खून से वो उसे सींचती है।
एक पिता दिन रात मेहनत करके अपने बच्चे को धन देता है ताकि वो कुछ बन सके वहीं एक गुरु पूरा जीवन खपा देता है ताकि उसका शिष्य समाज में ज्ञानी होने का सम्मान प्राप्त करें।
ये 3 लोग जीवन में ऐसे होते है जो कभी आपसे कुछ नहीं मांगते है बल्कि आपकी ख़ुशी में ही इनकी ख़ुशी होती है।
लेकिन कलियुग में ऐसे भी बच्चे है जो अपनी 70 साल की मां को मारपीटकर धक्के मारकर घर से निकाल देते है।
वो भी एक ऐसे समय में जब हर समय कोरोना का साया आदमी के पीछे घूम रहा है।
अगर एक मां अपने पुत्रों के जीवित रहते हुए ये कहे कि मैं भीख मांग लुंगी तो मेरा मानना है की ऐसे पुत्रों को तो भगवान यमराज भी अपनी शरण में नहीं लेंगे। इनके लिए तो नर्क की यातनाएं भी कम है।
एक मां जो दिल्ली से मुंबई आती है अपने बेटे के लिए, क्यूंकि बेटा बीमार है। उस माँ का दर्द देखिये, उसकी करुणा देखिये, अपनी उम्र की परवाह किये बिना वो कैसे दिल्ली से मुंबई का सफर तय कर लेती है।
यही मां की ताकत है जो उसे महान बना देती है। एक मां अपनी संतान के लिए जान दे सकती है लेकिन उस पर कष्ट नहीं आने दे सकती। लेकिन उस बेटे ने क्या किया ?
उस बेटे ने उसी 70 साल की माँ को ठोकर मार दी है। वो भटक रही थी लेकिन बरखा दत्त जी के कारण उसे एक सहारा मिला।
मैं आभार व्यक्त करता हूँ बरखा जी का जिन्होंने उस मां का दर्द पूरे देश के सामने रखा है। बुज़ुर्ग महिला का नाम लीलावती है, जो बंद्रा स्टेशन पर बिस्कुट और चावल खाकर अपने दिन गुज़ार रही थी।
मुझे पूरा विश्वास है कि बरखा दत्त ने उस महिला की मदद की होगी और उन्हें दिल्ली जाने में उनकी मदद भी की होगी।
इस वीडियो को देखने के बाद मैं आज के युवाओं से बस इतना निवेदन करना चाहता हूं की अपनी मां, पिता और गुरु की कद्र करो।
जिस मां ने आपको सीने से लगाकर ना जाने कितनी रात बिना सोये बितायी हो उस मां को ठोकर मारने से पहले उसके परिणाम का विचार करो।
{ I am glad today.that I don’t have a son }