बुधनी नर्मदा नदी किनारे NGT नियमों के उल्लंघन का मामला एक बार फिर बुधनी नगर परिषद क्षेत्र में सामने आया है। आरोप है कि नर्मदा नदी से 300 मीटर के भीतर प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मकान स्वीकृत किए जा रहे हैं और हितग्राहियों को पहली किस्त के प्रमाण पत्र भी वितरित किए जा चुके हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हाल ही में नगर परिषद द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कुछ हितग्राहियों को 1,00,000 रूपये की पहली किस्त के स्वीकृति प्रमाण पत्र दिए गए, जबकि इनमें से कई हितग्राही नर्मदा नदी के 300 मीटर दायरे के भीतर निवासरत बताए जा रहे हैं। यदि यह तथ्य सही है, तो यह NGT के नियमों और पर्यावरणीय मानकों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।
यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी सतीश मालवीय के कार्यकाल में भी इसी प्रकार नर्मदा किनारे नियमों के विरुद्ध प्रधानमंत्री आवास योजना के मकान स्वीकृत होने की चर्चा रही है। अब लोगों में आशंका है कि यदि भविष्य में कोर्ट अथवा NGT के आदेश के तहत कार्रवाई होती है, तो उस स्थिति में जिम्मेदारी तय होने के साथ संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई और वसूली तक की स्थिति बन सकती है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि नर्मदा किनारे क्षेत्रों का राजस्व विभाग द्वारा सर्वे पहले ही कराया जा चुका है, जो पूर्व एसडीएम राधेश्याम बघेल के कार्यकाल में संपन्न हुआ था। इसके बावजूद यदि प्रतिबंधित क्षेत्र में आवास योजना की स्वीकृतियां दी जा रही हैं तो यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब सर्वे रिपोर्ट उपलब्ध है, तो नगर परिषद द्वारा नियमों की अनदेखी कर स्वीकृतियां किस आधार पर दी जा रही हैं? और यदि भविष्य में न्यायालयीन आदेश आता है तो इसका खामियाजा गरीब हितग्राहियों को भुगतना पड़ेगा या फिर जिम्मेदार अधिकारी जवाबदेह होंगे?
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा NGT नियमों के उल्लंघन पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बुधनी नगर परिषद के सीएमओ से जो संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा, वही बुधनी के एसडीएम ने भी पलड़ा झड़ते हुए कहा कि इसका जवाब और बाइट कलेक्टर ही देंगे, मुझे इसकी जानकारी नहीं जानकारी लेकर दे सकूंगा