बैतूलः मध्यप्रदेश के बैतूल जिले से सरकारी जमीन के निजीकरण का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीढ़ियों से खेती कर रहे गरीब किसानों की जमीन कथित मिलीभगत से निजी हाथों में पहुंचाने का आरोप लगा है। करीब दस परिवारों की रोजी-रोटी छिनने से इलाके में आक्रोश बढ़ गया है।
पीड़ित ग्रामीणों के मुताबिक जिस सरकारी जमीन पर वे वर्षों से खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे, उसी जमीन को अधिकारियों और एक निजी व्यक्ति की सांठगांठ से पहले उसके नाम दर्ज कराया गया और बाद में दूसरे लोगों को बेच दिया गया। हालात तब तनावपूर्ण हो गए जब कथित नया मालिक करीब 200 लोगों के साथ जमीन पर कब्जा लेने पहुंचा और किसानों को डराकर वहां से भगा दिया गया।
अचानक हुए इस घटनाक्रम से गरीब परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस मामले को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जमीन को निजी हाथों से वापस लेकर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन शुरू करेंगे। ऐसे बड़ा सवाल है कि क्या प्रशासन इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई करेगा या फिर यह जमीन भी विवादित जेल भूमि की तरह निजी हाथों में चली जाएगी। फिलहाल जनपद वासियों की नजर प्रशासनिक जांच और कार्रवाई पर टिकी हुई है।