देश में 34 साल बाद नई शिक्षा नीति की घोषणा की गई है। इससे पहले 1986 में शिक्षा नीति लागू की गई थी यानी 34 साल बाद देश में एक नई शिक्षा नीति लागू की जा रही है।
नई शिक्षा नीति में पाँचवी क्लास तक मातृभाषा, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई का माध्यम रखने की बात कही गई है और इसे क्लास आठ या उससे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। अंग्रेजी में पढ़ाई की अनिवार्यता यहीं समाप्त हो जाएगी। अंग्रेजी अब सिर्फ एक Subject के तौर पर पढ़ाई जाएगी।
स्कूल पाठ्यक्रम के 10 + 2 ढांचे की जगह 5 + 3 + 3 + 4 का नया पाठयक्रम संरचना लागू किया जाएगा जो क्रमशः 3-8, 8-11, 11-14, और 14-18 उम्र के बच्चों के लिए है।
इसके तहत स्कूल के पहले 5 वर्षों की पढ़ाई Foundation Stage मानी जाएगी। इसके बाद अगले तीन साल यानी तीसरी कक्षा से पांचवी कक्षा तक की पढ़ाई के दौरान छात्रों को भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा।
इसके बाद 9वीं से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई आखिरी स्टेज वाली होगी. इसमें छात्रों में विषय के प्रति गहरी समझ पैदा की जाएगी। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा पहले की तरह जारी रहेगी. लेकिन बच्चों के समग्र विकास करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इन्हें नया स्वरूप दिया जाएगा।
छठी क्लास से वोकेशनल कोर्स शुरू किए जाएंगे और इसके लिए इसके इच्छुक छात्रों को छठी क्लास के बाद से ही इंटर्नशिप करवाई जाएगी। अगर Accounts का कोई छात्र इतिहास की पढ़ाई करना चाहता है तो वो भी ऐसा कर सकता है।
छठी कक्षा में पहुंचने के बाद छात्रों को Computer Coding सीखने का मौका भी मिलेगा. इससे भारत के छात्र भी चीन जैसे देशों की तर्ज़ पर छोटी उम्र में ही Software और Mobile Phone Applications बनाने की तकनीक सीख पाएंगे।
पहली बार मल्टीपल एंट्री और एग्ज़िट सिस्टम लागू किया गया है। पहले अगर आप कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते थे तो आपको ग्रेजुएशन की डिग्री नहीं मिलती थी लेकिन नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद अगर आप एक साल के बाद कॉलेज छोड़ देते हैं तो आपको Certificate दिया जाएगा।
एग्ज़िट सिस्टम में एक साल के बाद सर्टिफ़िकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन-चार साल के बाद डिग्री मिल जाएगी। जो रिसर्च में जाना चाहते हैं वो एक साल के एमए (MA) के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद सीधे पीएचडी (PhD) कर सकते हैं. उन्हें एमफ़िल (M.Phil) की ज़रूरत नहीं होगी।
ई-पाठ्यक्रम क्षेत्रीय भाषाओं में विकसित किए जाएंगे। वर्चुअल लैब विकसित की जा रही है और एक राष्ट्रीय शैक्षिक टेक्नोलॉजी फ़ोरम (NETF) बनाया जा रहा है। उच्च शिक्षा संस्थानों में Arts और Humanities के विषय भी पढ़ाए जाएंगे।
संगीत, कला और साहित्य को देश के हर कॉलेज में पढ़ाया जाएगा। स्कूल और कॉलेज की फीस को नए नियम निर्धारित किए जाएंगे।
केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए नए National Higher Education Bill को फिलहाल कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है और अब इसे संसद में पेश किया जाएगा।