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चीन में परमाणु संयंत्र हादसे के 10 दिन बाद ही शीर्ष वैज्ञानिक की रहस्‍यमयी मौत, बढ़ा संदेह

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : चीन लगातार अपने चालबाजियों से दुनिया या देश के सामने नये मुसीबत लाता रहा है, चाहे वह कोरोना जैसी महामारी हो या परमाणु संयंत्र में गैस रिसाव जैसे हादसे। भले ही कोरोना को लेकर अभी ये पुष्टि नहीं हुई है कि ये महामारी चीन निर्मित ही वायरस है, लेकिन अभी तक इस मामले में चीन ही दुनिया के अधिकतर देशों के संदेह के कटघरे में है।

इसी बीच चीन के एक नए परमाणु संयंत्र में हादसे की खबर आई और इस खबर के 10 दिन बाद ही शीर्ष परमाणु वैज्ञानिक झांग झिजिआन की रहस्‍यमयी मौत ने फिर चीन पर सवालिया निशान उठाया है।

बताया जा रहा है कि झांग झिजियान एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद मारे गए। ऐसी अफवाह है कि चीन परमाणु हादसे को दुनिया से छिपाने का प्रयास कर रहा है। झांग को गुरुवार को सुबह मृत पाया गया था। वह प्रतिष्ठित हार्बिन इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी में वाइस चांसलर थे।

वर्ष 1963 में जन्‍मे झांग दो साल बाद रिटायर होने वाले थे। उनकी मौत से ठीक दो दिन पहले एक अन्‍य परमाणु विशेषज्ञ को हार्बिन यूनिवर्सिटी का नया वाइस चांसलर नियुक्‍त किया गया था। प्रोफेसर झांग के मौत की खबर की पुष्टि यूनिवर्सिटी के वीबो अकाउंट पर की गई। इस बयान में कहा गया है कि पुलिस ने मौका ए वारदात का मुआयना करके इसे हत्‍या मानने से इंकार कर दिया है।

चीनी सेना के बहुत करीबी थे झांग

यूनिवर्सिटी ने और ज्‍यादा विवरण नहीं दिया है। प्रोफेसर झांग को इनोवेशन की दुनिया में कई राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार मिल चुके हैं। हार्बिन टेक्निकल यूनिवर्सिटी देश की उन दो यूनिवर्सिटी में शामिल है जिसका चीनी सेना के साथ बहुत करीबी संबंध है। इस यूनिवर्सिटी ने पिछले साल जून महीने में अमेरिका में बने साफ्टवेयर को बैन कर दिया था। उसने दोनों देशों के बीच चल रहे व्‍यापारिक तनाव को देखते हुए लिया था।

बता दें कि इससे पहले चीन के एक परमाणु संयंत्र में हुए लीक के बाद से ही पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया था। एक हफ्ते पहले हुए इस लीक को चीन ने दुनिया से अबतक छिपाकर रखा हुआ था। इस परमाणु संयंत्र के निर्माण में फ्रांसीसी पावर ग्रुप ईडीएफ की लगभग 30 फीसदी हिस्सेदारी शामिल है। ईडीएफ ने इस लीकेज को लेकर अपनी स्वतंत्र जांच भी शुरू कर दी है। हालांकि, अभी तक लीक की भयावहता को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। पावर प्लांट के आसपास रहने वाले चीन के स्थानीय लोग रूस के चेर्नोबिल में आज से 35 साल पहले की घटना को याद कर डरे हुए हैं।

फ्रांसीसी कंपनी ने अमेरिका से मांगी मदद

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक हफ्ते से अमेरिकी सरकार इस लीकेज रिपोर्ट का आंकलन कर रही थी। इस रिपोर्ट में फ्रांसीसी कंपनी ईडीएफ ने यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी के सहायता की गुहार की थी। कंपनी ने इसमें अमेरिका को आसन्न रेडियोलॉजिकल खतरे की साफ साफ चेतावनी दी थी। इसमें बताया गया है कि चीनी सुरक्षा प्राधिकरण ग्वांगडोंग प्रांत में ताईशान परमाणु ऊर्जा संयंत्र के बाहर विकिरण की सीमा को बढ़ा रहा है। जिसके बाद यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इस प्लांट से रेडियोएक्टिव विकिरण हुआ है।

रेडियोएक्टिव गैसों के रिसाव से सनसनी

इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को ईडीएफ ने डिजाइन किया है। इतना ही नहीं, संचालन के काम में भी चीन इस कंपनी की मदद लेता है। इसी कंपनी ने रेडियोएक्टिव पदार्थ के रिसाव और खतरे की चेतावनी दी है। ईडीएफ ने कहा कि ताइशन संयंत्र के रिएक्टर नंबर 1 के प्राथमिक सर्किट से क्रिप्टन और जिनॉन गैस का रिसाव हुआ था। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि यह अक्रिय गैसें हैं लेकिन इनमें रेडियोएक्टिव गुण पाए जाते हैं। अगर भविष्य में रिसाव की मात्रा बढ़ती है तो बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।

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