1. हिन्दी समाचार
  2. जरूर पढ़े
  3. एक खुला ख़त सनातन धर्मी समाज ( हिन्दू समाज ) के नाम : पढ़िए

एक खुला ख़त सनातन धर्मी समाज ( हिन्दू समाज ) के नाम : पढ़िए

By: RNI Hindi Desk 
Updated:
एक खुला ख़त सनातन धर्मी समाज ( हिन्दू समाज ) के नाम : पढ़िए

Article By –

डॉक्टर मंजू डागर चौधरी { International journalist: ireland}

ये हिन्दू समुदाय के युवकों को अपने अंदर झांक कर देखना चाहिए। इनको देख कर लगता तो नहीं की कभी मंदिर में भी हनुमान चालीसा पढ़ी होगी जो चले हैं मस्जिद में हनुमान चालीसा पढ़ने। क्या इनको भी अब सड़कों पर नौटंकी करनी है।

इतने सारे हमारे मंदिर जीर्णोद्धार के इंतजार में हैं उनको जा कर सभांल ले यही काफी है। अब तिलक लगाने से क्या ये असामाजिक तत्व देश की दशा और दिशा निर्धारित करेगें।

ये जो दिखावे वाले नए -नए कट्टरता और ढ़ोग करने वाले हिन्दू संगठन बने हैं इन पर सरकार को तुरंत लगाम लगानी चाहिए इस से पहले ये हमारे समाज को कब्जाने की कोशिश करें इनके पँख कुचल देने चाहिए। ये कोई सनातनी धर्म की नुमाइंदगी करने वाले युवक नहीं हैं। हज़ारों साल पुराने सनातनी धर्म को ये क्या हनुमान चालीसा पढ़ने से समझ जाएंगे।

हिन्दू समाज के लोगो के लिए भी भी कुछ सवाल हैं। आपको सोचने को नहीं कहूंगी क्योंकि सोचने का वक़्त नहीं। अगर वक़्त रहते आपने भी अपने कट्टर एलीमेंट्स को लगाम नहीं लगाई तो भारत का ” अहिँसा परमो धर्म ” का विश्व को दिया संदेश अपने देश में ही दम तोड़ देगा।

जरा भारत के सुनहरी अक्षरो में वाले गरिमामय अतीत को मेरे थोड़े से शब्दो में ही समझने और आत्मसात करने की कोशिश करें।

हिन्दू काल गणना जिसके अनुसार समय अवधि को चार युगों में बाँटा गया है- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग एव कलियुग।

चलिए जानते हैं कि हिंदू सनातन धर्म के क्या है ये चार युग। मैं आपको बता दू कि एक तिथि वह समय होता है, जिसमें सूर्य और चंद्र के बीच का देशांतरीय कोण बारह अंश बढ़ जाता है। ये तिथियाँ दिन में किसी भी समय आरम्भ हो सकती हैं और इनकी अवधि उन्नीस से छब्बीस घंटे तक हो सकती है।

पंद्रह तिथियों का एक पक्ष या पखवाड़ा माना गया है। शुक्ल और कृष्ण पक्ष मिलाकर दो पक्ष का एक मास। फिर दो मास की एक ऋतु और इस तरह तीन ऋतुएँ मिलकर एक अयन बनता है और दो अयन यानी उत्तरायन और दक्षिणायन। इस तरह दो अयनों का एक वर्ष पूरा होता है।

15 मानव दिवस एक पितृ दिवस कहलाता है यही एक पक्ष है। 30 पितृ दिवस का एक पितृ मास कहलाता है। 12 पितृ मास का एक पितृ वर्ष। यानी पितरों का जीवनकाल 100 का माना गया है तो इस मान से 1500 मानव वर्ष हुए।

और इसी तरह पितरों के एक मास से कुछ दिन कम यानी मानव के एक वर्ष का देवताओं का एक दिव्य दिवस होता है, जिसमें दो अयन होते हैं पहला उत्तरायण और दूसरा दक्षिणायन। तीस दिव्य दिवसों का एक दिव्य मास। बारह दिव्य मासों का एक दिव्य वर्ष कहलाता है।

(1) 4,800 दिव्य वर्ष अर्थात एक कृत युग (सतयुग)। मानव वर्ष के मान से 1728000 वर्ष।
(2) 3,600 दिव्य वर्ष अर्थात एक त्रेता युग। मानव वर्ष के मान से 1296000 वर्ष।
(3) 2,400 दिव्य वर्ष अर्थात एक द्वापर युग। मानव वर्ष के मान से 864000 वर्ष।
(4) 1,200 दिव्य वर्ष अर्थात एक कलि युग। मानव वर्ष के मान से 432000 वर्ष।

12000 दिव्य वर्ष अर्थात 4 युग अर्थात एक महायुग जिसे दिव्य युग भी कहते हैं।

सत्य युग : वर्तमान वराह कल्प में हुए कृत या सत्य को 4800 दिव्य वर्ष का माना गया है। ब्रह्मा का एक दिवस 10000 भागों में बँटा होता है, जिसे चरण कहते हैं।

त्रेतायुग : त्रेतायुग को 3600 दिव्य वर्ष का माना गया है। त्रेता युग मानवकाल के द्वितीय युग को कहते हैं। यह काल राम के देहान्त से समाप्त होता है।

द्वापर : द्वापर मानवकाल के तृतीय युग को कहते हैं। यह काल कृष्ण के देहान्त से समाप्त होता है।

कलियुग : 1200 दिव्य वर्ष का एक कलियुग माना गया है। कलियुग चौथा युग है। आर्यभट्ट के अनुसार महाभारत युद्ध 3137 ई.पू. में हुआ था। कृष्ण का इस युद्ध के 35 वर्ष पश्चात देहान्त हुआ, तभी से कलियुग का आरम्भ माना जाता है। ( मेरे रिसर्च पर आधारित। कहीं गलत हूँ तब सही कीजिये गा। )

ये बस वो थोड़ा सा कालखंड मैंने बताया है ये बताने को कि यही वो वक़्त था जब हमारा वेदों की रचना का काल ,रामायण ,महाभारत का वक़्त था। अच्छाई से बुराई की तरफ ये काल चक्र घूमता रहा और आज बुराई का दौर यानिकि कलयुग चल रहा है।

मैं आपको बता दू कि प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता और उसके बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के एक लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायों -\-\ हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ वहीं दूसरी तरफ पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी के लगभग यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति में घुलमिल गये।

भारत देश के वैभव को देख कर मुग़ल आक्रांताओ ने लालच के वशीभूत होकर इस देश को लूटने का अभियान चलाया और ये पूरी तरह सफल रहा क्योंकि इस देश में जयचंदों की कमी न तब थी न आज है जो अपने लालच और स्वार्थ के लिए कब अपनों का गला कटवा दे कोई नहीं कह सकता।

800 साल तक लूटने के बाद भी जब इस देश का वैभव ख़तम नहीं हुआ तब अंग्रेजों ने भी हाथ आजमाने की ठानी और आ पहुंचे ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी के रुप में 1600 में। अगले 200 साल वो भी भारत और भारतीयों को लुटते रहे और आपको इस कदर निचोड़ दिया कि अपने ही देश में आप इतने नाकारा हो गये कि केवल मुठी भर 5000 अंग्रेज आप लाखों की जनसँख्या वाले देश को अपने तमंचे की नोक पर रखे रहे और लूट का सारा माल इंग्लैंड भेजते रहें जैसे की मुग़ल करते रहे।

अपने गौरवशाली ,वैभवशाली अतीत के बाद 800 साल की मुगलों की गुलामी और 200 साल की अंग्रेजों की गुलामी ने आपको नपुंसक बना दिया। सही और गलत का भेद करना ये समाज भूल गया। आज बुराई ,कट्टरता अपने चरम पर है। कोई और समझे न समझे आप कब से अपनी मानव सभ्यता के प्रति अपनी जिम्मेदारी भूलने लगे ?

राम ,कृष्ण की ये धरती अपनी कट्टरता के चरम पर है। अपने लोगो की कट्टरता और पथभ्रस्ट होते युवकों को समझाये कि धर्म का ठेकेदार न बने उसको आत्मसात करें बस। स्वामी विवेकानद जी ने कहा भी है कि अगर तुम्हारा पड़ोसी भूखा है तब मंदिर में प्रसाद चढ़ाना पाप है।

इसलिए अपने कर्मों को दुरुस्त कीजिये दिखावे को नहीं। कट्टरता किसी भी समुदाय को कब काल का कोपभाजन बनवा दे गी लोगो को पता भी नहीं चलेगा। इस वक़्त विश्व में इसी कट्टरता के चलते अरब देशों का हाल आप देख ही रहें हैं। तालिबान , बोको हरम , अल कायदा और भी न जाने कौन -कौन से पूरी दुनिया को तबाही की ओर ले जा रहें हैं केवल इसी कट्टरता की वजह से। यूनाइटेड नेशंस में अभी तक हिन्दू समुदाय के नाम पर कोई कलंक नहीं लगा है।

1947 में आज़ादी पा लेने के बाद भी आप में क्या बदला सोचिये जरा इससे पहले की देर हो जाये ? आप से सीधे -सीधे कुछ सवाल मैं यहां लिख रहीं हूँ कुछ आप भी सोचियेगा कहाँ चूक कर गए और कैसे जल्द से जल्द सुधार किया जा सकता है ताकि भारत खुशहाल रचा -बसा रहे।

सवाल 1 ) मुग़ल आक्रांताओ और अंग्रेजों की गुलामी के दौरान हम को अपनी बहु -बेटियों को बचाने के लिए मुगलों के पर्दे के रिवाज़ को अपनाना पड़ा लेकिन राजा राममोहन रॉय जैसे समाज -सुधारकों की वजह से हम इस मानसिकता से निकल पाये लेकिन क्या सच में निकल पाये। सोचियेगा जरुर।

आज भी गांव कस्बों में ही नहीं शहरो में भी कई घरों में महिलाओं को घुघट करवाया जाता है और इस का तर्क दिया जाता है कि इस से घर के बड़े बुजर्गों को इज़्जत मिलेगी। आप ध्यान से देखेगे तो पाएंगे कि घुघट के पीछे से और उन बुजुर्गों में कितने लड़ाई -झगङे सरेआम हो रहे होते हैं।

तब समझने की जरुरत है इज़्जत मान -सम्मान व्यवहार से मिलता है घुघट से नहीं। औरत को दोयम दर्ज़े में रखने की मानसिकता से बहार निकालिये। ये मानसिकता केवल हिन्दू पुरुष में ही नहीं है हर दूसरे घर की खुद औरत में भी है। दोनों को इससे बहार निकलने की जरुरत है। सोचिये इस पर जरूर।

सवाल 2 ) हमारे देवी -देवताओं में नारी को शक्ति का रूप कहा जाता है। आप मंदिर में तो उनकी पूजा करते हैं लेकिन घर के भीतर काहे उनको बेड़िया की सज़ा ,घर की चार – दीवारी ,ख़ानदान की इज़्जत ,बलात्कार ,दहेज़ ,घरेलू हिंसा जैसे अपराधों से हर रोज लड़ना पड़ता है। तब भी बहुत से घरों में अपनी मर्जी के साँस नहीं ले पाती वो।

सवाल 3 ) सरकारी आकड़ो के अनुसार भारत में हर 16 मिनट में एक बलात्कार होता है। साल भर में लगभग 40,000 इन आकड़ो को देख कर ही शर्म आती है कि क्या ये है गौरवशाली भारत का वर्तमान। ये तो वो आंकड़े हैं जो दर्ज होते हैं सोचिये जो दर्ज नहीं होते होंगे वो कितने भयानक होते होंगे। जब आप अपनी बेटियों की रक्षा ही नहीं कर पाते तब देवी माँ आपकी पूजा कैसे स्वीकार करती होंगी ?

सवाल 4 ) जाति प्रथा एक ऐसी कुरुर प्रथा है जो स्वस्थ समाज की जड़ें खोखली कर देती है। वही आप के साथ भी हुआ। ओहदे और अमीरी के जुनून ने आपको आँखें होते हुए भी अँधा बना दिया। आप इंसान को इंसान समझना भूल चुके हो। तभी आप के समाज के वो परिवार जिनको आप ने इंसान नहीं समझा वो तेजी से धर्म परिवर्तन करते को मुस्लिम बन रहें हैं या ईसाई। आप मुठी भर बचे परिवार क्या भारत के रहनुमा बने गे तब ?

सवाल 5 ) धर्म परिवर्तन कर के इन परिवारों के लिए तो लगभग 100 देशों और 56 देशों के दरवाज़े खुल जाये मुसीबत के समय में। आप सनातनी धर्म वाले कहाँ जाएंगे ? आप तो 1000 सालों में अपना देश ही नहीं अपना ज़मीर भी गिरवी रखने का रिकॉर्ड बनाये हुए हैं केवल कुछ सिक्कों के वास्ते। तब सोचिये कौन देश आपको सुरक्षा देगा जो खुद की सुरक्षा नहीं कर सकते।

सवाल 6 ) हमारे पंडितों ने मंदिर में अपने भोग -विलास के लिए एक देवदासी प्रथा बनाई हुई थी। वक़्त के साथ समाज -सुधारकों ने सरकार के साथ मिल कर इसको अनैतिक करार दिया और इस पर कानूनन रोक लगाई। लेकिन आपको जान कर हैरानी होगी कि महाराष्ट्र के कुछ गाँव में ये आज भी प्रचलित है।

क्योंकि उस बेचारी देवदासी की यही रोजी-रोटी है। उसके यहाँ बेटी होती है तब उत्सव मनाया जाता है की लीजिये एक और भोग -विलास के साधन ने जन्म ले लिया। बेटा पैदा होता है तब वही अपनी माँ या बहन के लिए ग्राहक लाता है।

सोच कर भी घिन आती है। क्यों कोई इस पर आवाज नहीं उठता ?सरकार भी कान पर हाथ धरे बैठी है क्योंकि गाँव की पंचायत के आगे वो भी लाचार महसूस करती है। यही कट्टर मानसिकता हमारे समाज की बीमारी है। इस पर लगाम लगाइये और समझाइये देश के कानून से ऊपर कुछ नहीं।

सवाल 7 ) भारत के कई राज्यों में आज भी जवान बहु -बेटियों का बाजार सजता है जहां कोई भी ऊंची से ऊंची बोली लगा कर उनको एक साल के लिए अपने घर ले जाता है वहा उसके बिस्तर से लेकर घर का सारा काम वही करती है जैसे उसने नौकरानी और व्यभिचारणी दोनों खरीद ली हो।

सोचिये एक साल बाद उसी औरत कि फिर से बोली लगती है और ज्यादा लगती है क्योंकि वो अनुभवी है। हैरान करने वाली बात है कि उसकी बोली लगाने वाले उसके ही खुद के बाप और भाई होते हैं। सोचिये ये घिनौना समाज देश को क्या तरक्की देगा जो बेटियों का शरीर बेच -बेच कर जीता है ?

सवाल 8 ) राजस्थान और कुछ अन्य राज्यों में एक और प्रथा है। इसको अटा – सट्टा प्रथा कहते हैं। इसमें जिस घर में बेटे की शादी की जाती है उसी घर की बेटी से अपने बेटे की भी शादी की जाती है। इस से कोई फर्क नहीं पड़ता की लड़की की उम्र 16 या 17 भी हो सकती है और पुरुष की 30 पार भी। एक और मुसीबत भी है इस प्रथा में कि अगर एक महिला घरेलू हिंसा का शिकार है तब दूसरे घर में उनकी बेटी को भी सज़ा के तौर पर घरेलू हिंसा का शिकार बनना पड़ता है। कई बार तो वो मर भी जाती है लेकिन कोई केस दर्ज नहीं होता। सोचिये कैसा समाज बनाया आपने।

सवाल 9 ) राजनीतिक दलों की छत्रछाया में जो नए -नए कर्मकांडी संगठन बन रहें हैं। इन सगठनों के लड़के -लड़की जिनका फ़ेशन गले में भगवा अंगोछा और माथे पर तिलक लगाए घूमने का बन रहा है इनको ठेकेदार बनने से रोकिये। ये आपके सनातन धर्म को जड़ों से ही उखाड़ फेंकेगे अगर आपने अपनी आँखे ऐसे ही बंद रखी तब। ये भीम आर्मी ,ग्वसाला के नाम पर चलने वाले संगठन और भी न जाने कितने ही छोटे -बड़े कट्टरता को बढ़ावा देने वाले संगठन आपके समाज को दिशाहीन कर रहें हैं इन पर रोक लगाइये।

सवाल 10 ) अपने घर की बेटियों -बहुओं को खुल कर जीने की आज़ादी दीजिये और अपने बेटों को अपनी और समाज की सभी महिलाओं का आदर और अदब करना सिखाइये। घर के बड़े -बुजुर्गों को भी जेनेरशन गैप के रस्ते से निकाल कर साथ मिलाइये ताकि घरेलू लड़ाई -झगड़ों से राहत मिले। स्वस्थ रिश्ते ही स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं।

सवाल 11 ) एक नया समाज भी हमारे ही भीतर पनप रहा है वो किसी एक धर्म से जुड़ा हुआ तो नहीं है लेकिन हमारे ही समाज में उभर रहा है। भले ही कानूनन उसकी इज़ाज़त है लेकिन वो मनुष्य जाति के लिए घातक है। वो नया समाज है लेस्बियन और गेय का।

इंसान को इंसान होने का हक़ तो मिलना चाहिए लेकिन प्रकर्ति से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। अगर एक पुरुष या एक औरत से ही मानव जाति विस्तार ले सकती तब दोनों की एक ही समय पर धरती पर जरुरत ही नहीं थी।

इसलिए अपने बच्चों को पुरुष और औरत होने की अहमियत समझाइये कि पूरी मनुष्य जाति के विस्तार के लिए कितनी आवश्यक है। हमारे इस नए बनते समाज में नेता ,अभिनेता , प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर अमीर ,गरीब सब तबके शामिल हैं। यहां पर आपराधिक मानसिकता वाले लोग भी पनपते हैं क्योंकि दिमाग के दोनों हिस्से साथ काम नहीं करते।

सवाल 12 ) सबसे महत्वपूर्ण है ये सवाल। कृपया करके ये बाबाओं और दिखावे वाली गुरुमाओं के आश्रमों में जाना बंद कीजिये। इन्होंने सनातन धर्म को बदनाम करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। आपको क्यों नहीं समझ आता कि कलयुग में भगवान नहीं मिला करते तभी इसका नाम कलयुग है।

लेकिन लोग पागलों की तरह लाखों की सँख्या में इनके अनुयायी बनते हैं। बाबा राम रहीम ,बाबा रामपाल , बाबा आसाराम और मजे की बात ये कि महिलाएं भी इस रेस में शामिल हैं स्वघोषित देवियाँ बन कर।

आप सब ने देखा ही है कि ये भगवान और धर्म के नाम पर कर्मकाण्ड बेचना इनका व्यापार है और रंगरलियों का इनका ताम -झाम भी। इस लिए इन पाखंडियो को सिरे से ही नकारिये। आपके मेहनत के पैसों में से चंदा ले लेकर ये आश्रम पलते हैं और व्याभिचार से लेकर वैभव का जीवन बसर करते हैं बिना एक तिनका तोड़े हुए क्योंकि आपका ब्रेन वाश करने की कला वो भली भाँति जानते हैं।

देखिए ये सारे काले सवाल आपके ही उन्नतिशील समाज के है जो आपको आईना दिखा रहें हैं। और भी बहुत कुछ है जो मैं आगे लिखती रहूँगी। कल भी लिखा था लेकिन फिर भी कुछ मेरे मेसेंजर में मुझको कुरान पढ़ने वाले आ गए थे। आज भी कुछ धर्म के ठेकेदार मुझको ज्ञान देने आये उससे पहले खुद उसको समझ लीजिये। अपने समाज में बढ़ती बुराइयों को दूर कीजिये और स्वस्थ समाज का निर्माण कीजिये।

कहीं ऐसा न हो कि इतनी देर हो जाये कि कुछ बचाने को कुछ न बचे। मुस्लिम समुदाय के पास 56 देश है, ईसाइयों के पास 100 से ज्यादा और बुद्धिज़्म को मानने वाले 10 देश , कम्युनिस्ट भी कई देश हैं लेकिन आपके पास केवल भारत है केवल भारत। गुरु नानकदेव जी ने कहा भी था जब एक गाँव के लोगो ने उनसे बुरा व्यवहार किया तब उन्होंने कहा कि बसे रहो और दूसरे गांव वालो ने उनसे अच्छा व्यवहार किया तब उन्होंने उन्हें कहा उजाड़ जाओ।

Copyright & Dr. Manju Dagar Chaudhary ( International Journalist) Ireland

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...