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MP News: खाद वितरण में लापरवाही पर दिग्विजय सिंह का सख्त रुख, भाजपा सरकार पर लगाए सहकारिता को खत्म करने के आरोप

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने गुना जिले में खाद वितरण केंद्र का निरीक्षण कर अधिकारियों की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई। शुक्रवार रात गुना पहुंचे सिंह ने शनिवार सुबह सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और फिर नानाखेड़ी मंडी में खाद वितरण केंद्र का दौरा किया।

By: Rekha 
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MP News: खाद वितरण में लापरवाही पर दिग्विजय सिंह का सख्त रुख, भाजपा सरकार पर लगाए सहकारिता को खत्म करने के आरोप

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने गुना जिले में खाद वितरण केंद्र का निरीक्षण कर अधिकारियों की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई। शुक्रवार रात गुना पहुंचे सिंह ने शनिवार सुबह सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और फिर नानाखेड़ी मंडी में खाद वितरण केंद्र का दौरा किया। यहां संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति पर वे भड़क उठे और कहा कि उनकी मौजूदगी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब वे वहां आए हैं, तो संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान केवल कृषि विभाग के उपसंचालक ही वहां मौजूद थे, जबकि वितरण केंद्र के प्रभारी और डिप्टी रजिस्ट्रार नदारद रहे। इस पर दिग्विजय सिंह ने अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे और कहा, “यह आपकी जवाबदारी है कि DMO साहब यहां मौजूद हों।” उन्होंने कलेक्टर के साथ मीटिंग का समय भी याद दिलाते हुए अधिकारियों को जवाबदेही का अहसास कराया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह ने भाजपा सरकार पर सहकारिता आंदोलन को खत्म करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में 100 प्रतिशत खाद का वितरण सहकारी समितियों द्वारा किया जाता था, जो अब घटकर 40 प्रतिशत रह गया है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है और उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

सिंह ने यह भी खुलासा किया कि निजी विक्रेता किसानों को खाद के साथ नैनो यूरिया और अन्य उत्पाद जबरन दे रहे हैं, जिसे कृषि मंत्रालय ने गलत ठहराया है। इसके चलते खाद की लागत बढ़कर 2000 रुपए तक पहुंच रही है, जो किसानों पर आर्थिक बोझ डाल रही है। बुधनी और श्योपुर जैसे चुनावी क्षेत्रों में अधिक खाद आपूर्ति का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि चुनावी क्षेत्रों में कोटा बढ़ाया जाता है, जबकि अन्य जगहों पर कमी कर दी जाती है।

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