मध्यप्रदेश में नए साल की पहली कैबिनेट बैठक मंगलवार, 6 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुई। यह बैठक प्रदेश की पहली ई-कैबिनेट बैठक रही, जिसमें कई अहम और दूरगामी निर्णय लिए गए। बैठक में सिंचाई, सड़क निर्माण, आदिवासी क्षेत्रों के विकास और डिजिटल गवर्नेंस को लेकर बड़े फैसलों पर मुहर लगी।

इस ई-कैबिनेट व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी मंत्रियों और विभागीय प्रभारियों को टैबलेट प्रदान किए गए हैं। बैठक के दौरान ई-कैबिनेट एप्लीकेशन को लेकर प्रस्तुतीकरण और प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे भविष्य में कैबिनेट की पूरी कार्यवाही डिजिटल माध्यम से संचालित की जा सके। सरकार के अनुसार जनवरी के आखिरी सप्ताह से कैबिनेट की सभी बैठकों में केवल ई-कैबिनेट सिस्टम का ही उपयोग किया जाएगा।
कैबिनेट निर्णयों की जानकारी चैतन्य कुमार काश्यप ने दी। उन्होंने बताया कि बुरहानपुर जिला सिंचाई के मामले में अभी 41वें स्थान पर है, जिसे सुधारने के लिए दो बड़ी योजनाओं को स्वीकृति दी गई है-
झिरमिटी मध्यम सिंचाई परियोजना (बुरहानपुर विधानसभा)
लागत: ₹922 करोड़
सिंचाई क्षमता: 17,700 हेक्टेयर
नेपानगर विधानसभा सिंचाई परियोजना
लागत: ₹1,676 करोड़
सिंचाई क्षमता: 34,100 हेक्टेयर
लाभार्थी: 22,600 किसान परिवार
इन दोनों योजनाओं से कुल 2,589 करोड़ रुपये की सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

कैबिनेट ने नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से जुड़ी योजनाओं पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए। साल 2028 तक नर्मदा का पानी लिफ्ट किए जाने के लक्ष्य के तहत-
नर्मदा-क्षिप्रा बहुउद्देशीय योजना (₹2,489 करोड़)
बदनावर माइक्रो लिफ्ट इरिगेशन योजना (₹1,520.92 करोड़)
इन दोनों परियोजनाओं को नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट कंपनी को हस्तांतरित किया गया है। अब तक राज्य सरकार द्वारा किए गए खर्च को कंपनी की अंश पूंजी में बदला जाएगा और रख-रखाव सहित संचालन की जिम्मेदारी कंपनी निभाएगी।
प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत आदिवासी न्याय महाअभियान में बड़ा फैसला लिया गया है। बैगा, भारिया और सहरिया जनजाति बहुल 22 जिलों में ₹795 करोड़ की लागत, 1,039 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण और 112 पुलियों का निर्माण किया जाएगा, जिससे दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की योजना को 2026-27 से 2030-31 तक अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाया गया है। इसके तहत ₹17,196 करोड़ से 20,000 नई सड़कें, 1,200 नए पुल, 88,517 किलोमीटर मौजूदा सड़कों का उन्नयन जिसपर अनुमानित खर्च: ₹10,000 करोड़ है।
ई-कैबिनेट एप्लीकेशन एक कागज-रहित, सुरक्षित और गोपनीय डिजिटल सिस्टम है, जिसके जरिए मंत्री कहीं से भी कैबिनेट एजेंडा देख सकेंगे, पुराने फैसलों का पालन प्रतिवेदन देख सकेंगे, फोल्डर वितरण, कागज और समय की बचत होगी।सरकार का कहना है कि इस नवाचार से मंत्रिपरिषद से जुड़ी समस्त जानकारी डिजिटल रूप में सुलभ होगी और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
मध्यप्रदेश की इस पहली ई-कैबिनेट बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि मोहन सरकार एक तरफ जहां सिंचाई, सड़क और आदिवासी विकास जैसे बुनियादी मुद्दों पर बड़े निवेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर शासन को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी तेज़ी से आगे बढ़ रही है।