मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गुरु गोविंद सिंह जी एवं उनके परिवार की शहादत से जुड़े गौरवशाली इतिहास को शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे आने वाली पीढ़ी गुरु साहिबान के बलिदान, साहस और मानवता के संदेश को जान-समझ सकेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 26 दिसंबर को शासकीय स्तर पर बाल दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर से जुड़े विषयों को शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चों में इतिहास, संस्कार और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत किया जा सके।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व जैसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी भूमि और व्यवस्थागत सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिख परंपरा से जुड़े आयोजनों में सरकार पूरी संवेदनशीलता और सम्मान के साथ सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री ने गुरु साहिबान की शहादत, बलिदान और मानवता के संदेश को संरक्षित एवं प्रचारित करने की प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह विरासत केवल सिख समाज की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की अमूल्य धरोहर है।

डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन में गुरु नानक देव जी के आगमन से जुड़े स्थलों और परंपराओं को मान्यता और सम्मान देने का भाव भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों को पहचान और संरक्षण दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति और सिख परंपरा के मानवतावादी, सेवा और समानता के मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार निरंतर प्रयास करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुरुजी के इतिहास, आयोजनों और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े सभी विषयों में मध्यप्रदेश सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।
