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आगरा में मौत का मॉक ड्रिल!, आखिर क्या हुआ उस रात पारस हॉस्पिटल में, मरीजों के शरीर नीले क्यों पड़े

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: मनीष जैन/ सत्यम दुबे

आगरा: डॉक्टर, शब्द सुनते ही बिमार लोगो में नये जीवन की आस जग जाती है। इतनी ही नहीं दुनिया में डॉक्टर को दूसरे भगवान का दर्जा दिया जाता है। लोगो की जिंदगी को कोई अगर बचा सकता है, तो यह सौभाग्य केवल डॉक्टरों को ही मिला हुआ है। आज हम ये सारी बातें आपको इसलिए बता रहे हैं कि ताज नगरी आगरा से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसे जानकर आप भी जान बचाने वाले डॉक्टरों पर शक करने लगेंगे। दरअसल, कोरोना महामारी के दूसरे लहर के कहर से ऑक्सीजन की भारी किल्लत थी। बात है 26 अप्रैल के रात की, ताज नगरी आगरा के श्री पारस हास्पिटल में ऑक्सीजन की कमीं हुई तो डॉक्टरों ने मॉक ड्रील कर दी। डॉक्टरों का यह निर्णय वारदात हो गया। मॉक ड्रील से उस रात 22 मरिजों ने आपनी जान गंवा दी थी। जिसका विडियो सोशल मीडिया पर वायर हो रहा है, जिससे हड़कंप मचा गया है।

आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर जो विडियो वायरल हो रहा है, वह जान गंवाने वाले मरीजों की तरफ से तमाम सवाल खड़े कर रहा है। जो मरीज अपनी जान बचाने के लिए श्री पारस हॉस्पिटल में भर्ती हुए, और उनके साथ डॉक्टरों ने ऑक्सीजन बंद करके इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया है, इन मौतो का जिम्मेदार कौन होगा?

26 अप्रैल को ऑक्सीजन की कमी होने पर कोरोना मरीजों की उखड़ती सांस के बीच जानलेवा मॉक ड्रिल की गई। वक्त था सुबह सात बजकर पांच मिनट का डॉक्टरों के एक निर्णय ने बिना इसका दुष्प्रभाव जानें ऑक्सीजन बंद दिया। उस रात 96 मरीजों में से 22 मरीजों का दम घुटने लगा और  शरीर नीला पड़ गया। चार मरीजों ने रात तक हम तोड़ दिया। एक कहावत है कि आप कितने भी सफाई के साथ पाप करें, वह समय के साथ ब्याज तक आपसे वसूल लेता है। ये कहावत यहां लगू हो गई, हास्पिटल संचालक डा अरिंजय जैन का वीडियो वायरल हो गया। सोमवार को जिलाधिकारी आगरा प्रभु एन सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं।

बता दें कि कोरोना के दूसरे लहर से अप्रैल महीना का अंत होते-होते आक्सीजन की कमी हो गई। हॉस्पिटल संचालकों ने ऑक्सीजन खत्म होने वाली है, की चेतावनी के नोटिस चस्पा कर दिए। ऑक्सीजन की भारी किल्लत से कई हास्पिटलों में मरीजों की मौत हुई। श्री पारस हास्पिटल में भी 26 अप्रैल को चार और 27 अप्रैल को तीन मरीजों की मौत हुई। हॉस्पिटल के संचालक डा अरिंजय जैन का ICU स्टाफ के अलाव अन्य लोगों के साथ 28 अप्रैल को बातचीज करने के तीन वीडियो वायरल हो रहे हैं।

इन विडियो में पहला तो 25 अप्रैल का है, इसमें सप्लायर द्वारा आक्सीजन की आपूर्ति के लिए हाथ खडे़ करने पर किस तरह से प्रबंधन किया। वायरल वीडियो में डा अरिंजन जैन कह रहे हैं 96 मरीज भर्ती थे। आगे वो कह रहे हैं कि अब उन मरीजों को छांटो जिनकी आक्सीजन बंद हो सकती है। एक मॉकड्रिल कर के देख लेते हैं, ‘समझ जाएंगे कौन सा मरेगा और कौन सा नहीं मरेगा’। इसके बाद 26 अप्रैल को सुबह सात बजे पांच मिनट के लिए आक्सीजन बंद कर दी गई। ऑक्सीजन बंद होते ही 22 मरीज छंट गए, जिनका  दम घुटने लगा और शरीर नीला पड़ गया।

ऑक्सीजन की कमी होने के बाद भी बेड खाली होते ही नए मरीज भर्ती किए गए। चार मरीजों की मौत हुई, कुछ देर बाद ही नए मरीज भर्ती कर लिए गए। हास्पिटल में हुई मौतों का आडिट होना चाहिए।

इस हॉस्पिटल की लापरवाही का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि पिठले साल 2020 में अप्रैल के महीने में ही ICU में मंटोला निवासी कोरोना संक्रमित महिला मरीज भर्ती रही, इससे मरीजों के साथ ही कर्मचारी और तीमारदार कोरोना संक्रमित हो गए। मौत भी हुई,  इसके बाद हास्पिटल को सील कर दिया गया था और मुकदमा दर्ज हुआ था। कई महीने तक हॉस्पिटल सील रहा। इसके बाद हॉस्पिटल को कोविड हॉस्पिटल बनाने के आदेश जारी किए गए। लेकिन  जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की सिफारिश के बाद हॉस्पिटल की सील खोल दी गई।

चारों वायल विडियो के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।

पहले वीडियो में डा अरिंजन जैन बता रहे हैं कि आक्सीजन सप्लायर के साथ हुई बातचीत। ऑक्सीजन सप्लायर ने कहा बास कत्‍ल की रात है,आक्सीजन कांड हो गया, सुबह तक का माल है। मोदीनगर ड्राई हो गया, गाजियाबाद ड्राई हो गया, दिल्ली से गाड़ी आ नहीं रही, माल नहीं आ पाएगा। कैसी बातें कर रहे हो। मजाक सा कर रहे हो। आक्सीजन नहीं मिलेगी क्या, तो क्या हो गया डीएम साहब नहीं देंगे। आने दो तो कोई समाधान नहीं है। हम उसकी बात हल्के में ले रहे वो ऐसे बैठा हुआ था, बोला मसाला खिलाओ। हमें आधा घंटा स्वीकार करने में लग गया कि ऐसी घटना भी होगी आगरा में।

दूसरे वीडियो में देखा/सुना जा सकता है कि मुख्यमंत्री भी नहीं मंगा सकते आक्सीजन। 96 मरीज भर्ती थे और 12 घंटे का समय। सप्लायर ने कहा साहब मरीजों को डिस्चार्ज करो। आक्सीजन कहीं नहीं है, मुख्यमंत्री नहीं मंगा सकते आक्सीजन। लोगों को समझाना शुरू किया, भाई समझो बात को, मैंने कहा अब कोई नहीं जा रहा, सब सो जाओ। अब वो छांटो जिनकी आक्सीजन बंद हो सकती है, एक ट्रायल मार दो एक मॉक ड्रिल कर के देख लेते हैं, समझ जाएंगे कौन सा मरेगा और कौन सा नहीं मरेगा। सुबह सात बजे माकड्रिल हुई, ये किसी को पता नहीं है। छंट गए 22 मरीज छंट गए, ये मरेंगे। नीले पड़ने लगे। 74 बचे, इन्हें टाइम मिल जाएगा और बचा लेंगे इसके बाद तीमारदारों से कहा अपना अपना सिलेंडर लाओ।

तीसरे वीडियो में देखा/सुना जा सकता है कि तीमारदारों को पत्र दे दिया 12 घंटे का समय है। 10 बजे तक के लिए आक्सीजन है, अपने मरीज को कहीं ले जाओ, तीमारदारों ने कहा कि कहां लेकर जाएं। बेड खाली नहीं हैं। यहां आक्सीजन नहीं मिलेगी तो कहीं और भी नहीं मिलेगी।

इस पूरे आपराधिक मामले में अरिंजय जैन ने सफाई देते हुए कहा कि आक्सीजन की कमी होने पर यह देखने के लिए कि कितने मरीजों को हाई फ्लो आक्सीजन की जरूरत है, इसके लिए माक ड्रिल किया गया था। ऑक्सीजन की कमी से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई।

वहीं जिलाधिकारी पीएन सिंह ने कहा कि श्री पारस हास्पिटल में 26 अप्रैल को चार और 27 अप्रैल को तीन मरीजों की मौत हुई। एक भी मरीज की मौत आक्सीजन की कमी से नहीं हुई है। 26 अप्रैल को 121, 27 अप्रैल को 117 और 28 अप्रैल को 135 ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति की गई।

वहीं जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरसी पांडेय की मानें तो उन्होने कहा कि वीडियो के आधार पर जांच कराएंगे, इसके लिए टीम गठित की जा रही है।

एक तरफ डॉक्टर खुद की जान खतरे में डाल कर लोगो की जान बचाने में जुटे थे, तो वहीं दूसरी तरफ ऐसे डॉक्टर भी हैं, जो मरीजों की जान की परवाह किये बिना कुछ भी निर्णय ले लेते हैं।

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