पीडीपी की प्रमुख और जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ़्ती को कल आख़िरकार सरकार ने रिहा कर दिया है। उनकी रिहाई एक साल, दो महीने और 9 दिन बाद की गई है। पिछले साल पांच अगस्त को जब देश के गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में धारा 370 हटाने के एलान किया था उसी के बाद उन्हें नजरबंद कर दिया गया था।
दरअसल 6 फरवरी को उनके हिरासत की अवधि खत्म हो रही थी लेकिन सरकार ने उन्हें एक बार फिर नजरबंद कर दिया। इस बार उन्हें पब्लिक सेक्युरिटी एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था।
आपको बता दे की इस एक्ट को 1978 में बनाया गया था जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को बिना किसी ट्रायल के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। महबूबा मुफ़्ती की हिरासत इस लिए भी विवादों में रही क्योंकि आठ महीने में उनकी चार जगह बदली गई।
खास बात यह भी है की जितने भी नेता उस दौरान हिरासत में लिए गए थे उनमे से सभी एक साल के पहले ही रिहा कर दिए गए थे लकिन सिर्फ महबूबा मुफ़्ती ही एक ऐसी नेता थी जो अब तक रिहा नहीं की गई थी।
Ms. Mehbooba Mufti being released @dipr
— Rohit Kansal (@kansalrohit69) October 13, 2020
इससे पहले फारूक अब्दुल्ला को दस मार्च को वहीं उनके बेटे उमर को 25 मार्च को रिहा कर दिया गया था। महबूबा की हिरासत को लेकर उनकी बेटी ने सुप्रीम कोर्ट का रख भी किया था जिसको लेकर सरकार से कोर्ट ने पूछा था की आप कब तक उन्हें हिरासत में रखेंगे ?
हालांकि इस मसले पर सरकार को कोर्ट में जवाब देना था लेकिन उसके पहले ही उन्हें रिहा कर दिया। बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला चुकी महबूबा के तेवर आज भी बरकरार है।
कल जब उन्हें रिहा किया गया तो उसके बाद उन्होंने एक ऑडियो संदेश जारी किया और इस बात को बता दिया की उन्हें आज भी सरकार के उस निर्णय से आपत्ति है जिसमे अचानक से आर्टिकल 370 हटा दिया गया।
उनके ट्विटर अकाउंट से उनका यह ऑडियो पब्लिश किया गया है जिसमें उन्होंने अपने समर्थकों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने उस सन्देश में कहा, मैं आज एक साल से ज्यादा अर्से के बाद रिहा हुई हूं। इस दौरान 5 अगस्त 2019 के काले दिन का काला फैसला हर पल मेरे दिल और रूह पर वार करता रहा।
After being released from fourteen long months of illegal detention, a small message for my people. pic.twitter.com/gIfrf82Thw
— Mehbooba Mufti (@MehboobaMufti) October 13, 2020
मुझे अहसास है कि यही कैफियत जम्मू-कश्मीर के तमाम लोगों की रही होगी। हममें से कोई भी शख्स उस दिन की डाकाजनी और बेइज्जती को कतई भूल नहीं सकता।
आगे उन्होंने कहा, हम सबको इस बात को याद करना होगा कि दिल्ली दरबार ने पिछले साल 5 अगस्त को गैर-आइनी, गैर-जम्हूरी, गैर-कानूनी से जो हक छीन लिया, उसे वापस लेना होगा।
उसके साथ-साथ मसले कश्मीर जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर के हजारों लोगों ने अपनी जान न्योछावर कीं, उसको जारी रखने के लिए हमें अपनी जद्दोजहद जारी रखनी होगी। मैं मानती हूं कि यह रहा कतई आसान नहीं होगी।
लेकिन मुझे यकीन है कि हम सबका हौसला और अजम ये दुश्वार रास्ता तय करने में मॉविन होगा। आज जबकि मुझे रिहा किया गया है, मैं चाहती हूं कि जम्मू-कश्मीर के जितने लोग मुल्क के मुख्तलिफ जेलों में बंद हैं, उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाए।