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Meerut: शादी के डेढ़ साल बाद मिग-21 विमान क्रैश में शहीद हुए अभिनव चौधरी, समाज के लिए कायम की थी मिसाल

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : पंजाब के मोगा में शुक्रवार देर रात लड़ाकू विमान मिग-21 क्रैश कर गया, जिसके बाद पूरे मेरठ में शोक की लहर दौड़ गई। क्योंकि इस हादसे में मेरठ का वो लाल शहीद हुए, जिसने दहेज प्रथा जैसे विशालकाय नाग के मुंह पर जोरदार तमाचा जड़ को समाज को एक संदेश दिया। हालांकि इनके शादी के अभी डेढ़ साल भी सहीं से नहीं गुजरे थे की ये मिग-21 हादसे के शिकार हो गये। हम बात कर रहे है मेरठ के लाल और स्क्वाड्रन लीडर अभिनव चौधरी की।

आपको बता दें कि अभिनव का परिवार मूल रूप से बागपत का रहने वाला है। उन्होंने और उनके परिवार ने मोटे दहेज वाले रिश्ते ठुकराकर मिसाल कायम करने के साथ समाज में भी सकारात्मक संदेश दिया था, और 25 दिसंबर 2019 को शादी की थी। जिसके बाद उनके इस कदम से इनकी खूब सराहना हुई थी।

बता दें कि गंगासागर कॉलोनी स्थित आवास पर अभिनव की लगन-सगाई हुई तो पिता सतेंद्र चौधरी ने कन्या पक्ष से रस्म के तौर पर केवल एक रुपया ही स्वीकार किया था। सतेंद्र का मानना था कि शादी में दहेज की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए। दहेज दो परिवारों को जोड़ने का जरिया नहीं है। इस कुप्रथा पर पूर्ण रोक लगनी चाहिए।

मेरठ में की प्राइमरी पढ़ाई

अभिनव शुरू से ही पढ़ाई लिखाई में बेहद होनहार रहे हैं। पढ़ाई के अलावा भी उनकी रूचि तरह तरह के खेलों व अन्य गतिविधियों में रही है। पांचवी तक की पढ़ाई ट्रांसलेट एकेडमी में हुई थी। इसके बाद कक्षा 6 से 12वीं तक की पढ़ाई राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कालेज देहरादून में हुई। वहीं रहते हुए पढ़ने के दौरान अभिनव ने पढ़ाई के साथ-साथ फौजी जीवन को भी अपनाना शुरू कर दिया था। वहां से निकलकर वे एनडीए पहुंचे और एनडीए के बाद एयर फोर्स अकेडमी की ट्रेनिंग पूरी कर 2014 में वायु सेना में भर्ती हुए।

इसके बाद उन्होंने पुणे में एनडीए की ट्रेनिंग और पढ़ाई के बाद हैदराबाद में एयर फोर्स अकेडमी में अफसर बनने का प्रशिक्षण पूरा किया। आपको बता दें कि अभिनव को पहली पोस्टिंग पठानकोट एयरबेस में मिली थी। अभिनव के पिता सत्येंद्र चौधरी के अनुसार अभिनव अभिनंदन के पसंदीदा अफसरों में से एक थे। अभिनंदन उनसे सीनियर थे लेकिन साथ में पोस्टिंग में रहे और एक साथ काम भी किया।

एक घंटे तक नहीं चला था पता

मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार रात करीब 11:00 से 11:30 के बीच यह घटना घटी थी। सूरतगढ़ राजस्थान में वर्तमान पोस्टिंग व ट्रेनिंग के दौरान वह ट्रेनिंग प्लेन उड़ाने के लिए निकले थे। उड़ान के बाद ही उनका संपर्क एयरफ़ोर्स। से टूट गया था खोजबीन के दौरान 1 घंटे तक कोई संपर्क नहीं रहा। इसी बीच पता चला कि भटिंडा और लुधियाना के बीच किसी गांव में उनका प्लेन दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। हालांकि परिवार को अभी तक यह जानकारी नहीं मिली है कि प्लेन क्रैश होने और अभिनव के दुर्घटनाग्रस्त होने का सटीक कारण क्या है। अभिनव के सिर पर चोट की जानकारी दी गयी है।

आपको बता दें कि किसी जमाने में फाइटर जेट मिग-21 विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ माने जाते थे। अब इसके चार स्क्वॉड्रन बचे हुए हैं। इनकी देखभाल और अपग्रेड भले ही किया गया हो लेकिन ये विमान न तो जंग के लिए और न ही उड़ान के लिए फिट हैं। बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद मिग-21 बाइसन विमान ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों के छक्के छुड़ा दिए थे।

हालांकि, लगातार दुर्घटनाग्रस्त हो रहे मिग-21 विमानों के कारण कई पायलट्स जान भी गंवा चुके हैं, अब इन विमानों जल्द से जल्द हटाने का वक्त आ गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय वायुसेना को 1964 में पहला सुपरसोनिक मिग-21 विमान मिला था। भारत ने रूस से 872 मिग विमान खरीदे थे, जिनमें से अधिकांश दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं और दो सौ के करीब प्रशिक्षित लड़ाकू पायलट खो चुके हैं। 1971 से 2012 के बीच चार सौ बयासी मिग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए। यानी सालाना औसतन बारह मिग दुर्घटना के शिकार हुए।

सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार इस अवधि के दौरान इन दुर्घटनाओं में एक सौ इकहत्तर लड़ाकू पायलटों, उनतालीस आम नागरिकों, आठ सैन्यकर्मियों और विमान चालक दल के एक सदस्य की मौत हुई। हालांकि वायुसेना के पास अब जो मिग विमान हैं, उन्हें तकनीकी रूप से उन्नत किया जा चुका है, फिर भी ऐसे हादसे थम नहीं रहे हैं।

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