Home बड़ी खबर बंगाल में शाह की नीति से घबराई ममता, हुई गिड़गिड़ाने को मजबूर

बंगाल में शाह की नीति से घबराई ममता, हुई गिड़गिड़ाने को मजबूर

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नई दिल्ली: दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ने के बाद भी राजनीतिक पार्टियों में काफी सरगर्मी देंखने को मिल रही है। हो भी क्यों न? आने वाले कुछ ही दिनों में बंगाल में चुनाव जो होने हैं। बंगाल चुनाव में राजनीतिक पार्टिंयां बंगाल जीतने के लिए कमर कस चुकी हैं। बेतुके बयानों का भी सिलसिला जारी हो चुका है। बंगाल में होने वाले चुनाव में सबसे ज्यादा आक्रामक भारतीय जनता पार्टी ही दिखाई दे रही है। इस बात को आप इसी से समझ सकतें हैं कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा लगातार बंगाल का दौरा कर रहें हैं।

बीजेपी की इस आक्रामकता से बौखलाई तृणमूल कांग्रेस बीजेपी की आक्रामकता को ध्वस्तकरने के लिए तमाम विपक्षी दलों को एक साथ आने को अपली कर रही है। दूसरे शब्दों में कहें तो पार्टी ने बिहार के समींकरण को बंगाल में सेट करने का आह्वाहन किया है। तृणमूल कांग्रेस की बौखलाहट को आप इसी से समझ सकतें हैं कि पार्टी ने बुधवार को वाम मौर्चा और कांग्रेस अपील की है कि भाजपा के सांप्रदायिक और विभाजनकरी नीति को ध्वस्त करने के लिए बंगाल विधान सभा चुनाव में ममता बनर्जी का साथ दें।

बंगाल चुनाव ममता बनर्जी के लिए आसान नहीं होने वाला है, क्योंकि ममता बनर्जी के इस अपील को दोनो राजनीतिक पार्टियों ने सिरे से खारिज कर दिया है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने मौके की नजाकतको भुनाने के उद्देश्य से ममता बनर्जी के इस दांव को उल्टा उन्ही के सिर मढ़ दिया है। कांग्रेस ने ममता बनर्जी से कहा कि भाजपा के खिलाफ इस लड़ाई में गठबंधन नहीं बल्कि कांग्रेस में अपनी पार्टी का विलय कर लें।

इधर भाजपा ने ममता बनर्जी द्वारा गठबंधन की पेशकश पर चुटकी लेते हुए कहा कि बंगाल में अप्रैल-मई में होने वाले संभावित विधानसभा चुनावों में अपने दम पर भगवा पार्टी का मुकाबला करने का सामर्थ्य नहीं रखती है, 10 साल बंगाल में सरकार चलाने के बाद ममता बनर्जी में यदि भाजपा से चुनाव लड़ने का सामर्थ नहीं है तो उन्हें कांग्रेस से गठबंधन कर लेना चाहिए।

ममता बनर्जी के बौखलाहट का कारण लोकसभा चुनाव 2019 है। आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा ने सभी पार्टियों को चकमा देते हुए 18 सीटें निकालकर बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी थी। वहीं त़ृणमूल के गढ़ माना जाने वाला बंगाल ममता दीदी को जोर का झटका दिया था। लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी 22 सीटें ही जीत पाई थी। जबकि कांग्रेस को बंगाल में केवल दो सीटें ही नसीब हुई थी। वहीं माकपा, नीत और वाम मोर्चा की बात करें तो लोकसभा चुनीव में इनका खाता भी नहीं खुल सका था।

वहीं विधानसभा 2016 की बात करें तो कांग्रेस और वाम मोर्चा के गठबंधन ने 76 सीटें अपने खाते में डाली थी। जबकि तृणमूल कांग्रेस 211 सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज कर बंगाल में अपना परचम लहराया था।

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