मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित कैबिनेट बैठक वंदे मातरम् के सामूहिक गान के साथ आरंभ हुई। बैठक में किसानों, आदिवासियों, कर्मचारियों और प्रदेश के समग्र विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

कैबिनेट बैठक में किसानों के हित में बड़े फैसले किए गए। मुख्यमंत्री ने बताया कि भावांतर योजना को पूर्ण रूप से लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। इसके अंतर्गत अब तक 700 से अधिक किसानों को 1500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है, जिसे दो माह के भीतर सुनिश्चित किया गया। फूलों की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए भोपाल में 30 जनवरी को पुष्प महोत्सव आयोजित किया गया। वर्तमान में प्रदेश में करीब 4000 किसान फूलों की खेती से जुड़े हैं और लगभग 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पुष्प उत्पादन हो रहा है, जिसमें मालवा क्षेत्र की अहम भूमिका है।

सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए कैबिनेट ने 620 करोड़ 85 लाख रुपये की दो सूक्ष्म सिंचाई (लिफ्ट इरिगेशन) परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इससे 23,500 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा मिलेगी और 14,000 से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। इनमें कटनी जिले की बरही सूक्ष्म सिंचाई योजना शामिल है, जिसकी लागत 566.2 करोड़ रुपये है और इससे करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र कवर होगा। सरकार मानसागर बांध से अपने हिस्से के जल उपयोग को बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
कैबिनेट ने इस वर्ष को ‘किसान कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया, जिसमें जल प्रबंधन और सिंचाई पर विशेष फोकस रहेगा।
सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों के लिए ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए सरकार ने 25-30 वर्षों से लंबित मामलों का समाधान किया है। कैबिनेट ने 25,602 आदिवासी परिवारों को उनके आवासीय पट्टों की निःशुल्क रजिस्ट्री करने का फैसला लिया है। इस योजना पर आने वाला 600 करोड़ रुपये का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसका लाभ बड़वानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर जिलों के विस्थापित परिवारों को मिलेगा।
कैबिनेट ने विभिन्न विभागों की प्रमुख योजनाओं को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की स्वीकृति दी है, जिस पर लगभग 15,000 करोड़ रुपये का व्यय आएगा।
इनमें मुख्यमंत्री जन कल्याण संबल योजना, मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना और घरेलू हिंसा पीड़ितों के लिए सहायता योजना का विस्तार शामिल है। इसके अलावा जबलपुर में पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय के लिए 555 करोड़ रुपये के प्रावधान को भी मंजूरी दी गई।

सुशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने राज्य समाज कल्याण बोर्ड को भंग कर उसके कर्मचारियों का महिला एवं बाल विकास विभाग में संविलियन करने की स्वीकृति दी है। लंबे समय से लंबित प्रकरणों के निपटारे से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का लक्ष्य किसानों, विस्थापितों और कर्मचारियों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर गुड गवर्नेंस स्थापित करना है।
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में 29 जनवरी को महाकाल लोक की तर्ज पर पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण किया गया। यहां प्रतिमा संरक्षण और श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
प्रदेश सरकार किसान, आदिवासी, कर्मचारी कल्याण के साथ-साथ सिंचाई, संस्कृति और सुशासन को समान प्राथमिकता दे रही है। इन फैसलों से मध्य प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।