मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुजरात के संदर्भ में संबोधन देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान गुजरात में विकास का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जिसने विषम परिस्थितियों को भी अवसर में बदल दिया। गुजरात का उदाहरण यह दिखाता है कि स्पष्ट दृष्टि, मजबूत नेतृत्व और स्थानीय सहभागिता से कठिन से कठिन चुनौतियों का समाधान संभव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 जनवरी 2001 को कच्छ में आए विनाशकारी भूकंप (कच्छ) ने लगभग साढ़े बारह हजार लोगों को बेघर कर दिया। लोगों से उनका घर, आजीविका और जीवन का आधार छिन गया। उस समय सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इन परिवारों को न केवल रहने और खाने का सहारा दिया जाए, बल्कि उनकी आर्थिक पुनर्बहाली भी सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कच्छ गुजरात का ऐसा जिला है, जिसकी आबादी राज्य की कुल आबादी का लगभग एक चौथाई है, लेकिन वहां किसानों के पास खेती योग्य रकबा बहुत सीमित है। यह क्षेत्र ऐसी भूमि वाला है, जहां न तो पर्याप्त कृषि संभव है और न ही संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। लोग कहीं भी पशु चराते हैं, छोटे-छोटे साधनों से जीवनयापन करते हैं और बड़े उद्योगों की संभावना भी कम रहती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में गुजरात सरकार ने छोटे-छोटे रोजगार, विशेषकर हस्तशिल्प और हाथों से बनने वाले उत्पादों को बढ़ावा दिया। स्थानीय लोगों की कला और कौशल को पहचान दी गई। इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए डेंसिटी आधारित क्लस्टर विकसित किए गए, जिससे चार महीने जैसे सीमित समय में भी इन वस्तुओं को बेचकर लोगों की आय बढ़ाई जा सकी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कच्छ में टेंट सिटी और ट्रेड सिटी जैसे प्रयोग किए गए, जिन्होंने बाद में स्थायी मार्केट हब का रूप ले लिया। पर्यटन, व्यापार और स्थानीय उत्पादों को एक मंच मिला, जिससे न केवल रोजगार बढ़ा बल्कि कच्छ की पहचान वैश्विक स्तर पर बनी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात, विशेषकर कच्छ का यह अनुभव मध्यप्रदेश के लिए भी प्रेरणादायक है। सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में स्थानीय कौशल, छोटे उद्योग, पर्यटन और बाजार-आधारित मॉडल के जरिए विकास की नई राह बनाई जा सकती है। यही प्रधानमंत्री मोदी के विजन का सार है-जहां आपदा को अवसर में बदलकर जनकल्याण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया गया।