पिछले लेख में हमने जाना की वर्तमान समय में अष्टांग योग को प्रधानता दी गयी है, अष्टांग योग अर्थात योग के आठ अंग। यह आठ अंग सभी धर्मों का सार माने जाते हैं। ये आठ अंग हैं यम, नियम,आसन ,प्राणायम, प्रत्याहार, धारणा ध्यान और समाधि।
आज इस लेख में हम प्राणायाम की एक विधा कपालभाती के बारे में बात करने वाले है, बाबा रामदेव ने इस प्राणायाम को घर घर तक प्रसिद्द करके लाखों लोगों के जीवन में एक उम्मीद की किरण जगा दी है।

बाबा रामदेव अक्सर अपने योग शिविर में लोगों को इस प्राणायाम को करने की सलाह देते है, दरअसल संस्कृत शब्द कपाल का अर्थ होता है ललाट और भाति का अर्थ होता है प्रकाश अतः कपालभाति वह अभ्यास है, जो मस्तिष्क के आगे वाले भाग में प्रकाश या स्पष्टता लाता है।
इस प्राणायाम से कई प्रकार के जटिल रोग दूर होते हैं और स्वस्थ व्यक्ति इस अभ्यास को प्रति दिन करता रहे तो वह जीवनभर निरोगी रहता है। कपालभाति, प्राणायाम-योग का एक विशिष्ठ अंग है। ध्यान और मानसिक शक्ति के विकास के लिए कपालभाति को अति महत्वपूर्ण बताया गया है। प्राचीन समय के कुछ ज्ञानी महात्मा और योगी द्वारा कपालभाति को षटकर्म का एक भाग भी कहा गया है। कपालभाति से कुण्डलिनी शक्ति भी जागृत होती है।

कपालभाति प्राणायाम करने के लिए किसी अच्छी शांत और स्वच्छ जगह का चयन करके, वहाँ पर आसन बिछा कर पद्मासन में बैठ जाए।
कपालभाति प्राणायाम की शुरुआत करने के लिए श्वास सामान्य गति से शरीर के अंदर की और लेनी होती है। और तेज़ गति से बाहर निकालनी होती है। यह पूरी प्रक्रिया एक रिद्म में होनी चाहिए।
प्रत्येक सेकंड में एक बार पूरी सांस को तेजी के साथ नाक से बाहर छोड़ें, इससे पेट अन्दर चला जाएगा। कपालभाती में प्रत्येक सेकंड में एक बार सांस को तेजी से बाहर छोड़ने के लिए ही प्रयास करना होता है| साँस को छोड़ने के बाद, सांस को बाहर न रोककर बिना प्रयास किये सामान्य रूप से सांस को अन्दर आने दें|

बाबा रामदेव ने इस प्राणायाम के अनेक फायदे बताये है,
