रिपोर्ट: गीतांजली लोहनी
नई दिल्ली: एक समय था जब टेक्नोलॉजी इतनी आगे नहीं बढ़ी थी, उस दौरान गर्भ मे पल रहे बच्चें को देखना या उसके बारे में पता लगाना काफी मुश्किल था। लेकिन आज के समय में ऐसी-ऐसी टेक्नोलॉजी आ गयी है कि कुछ भी होना मुमकिन है। आज के समय में आप गर्भवती महिला के पेट मे पल रहे बच्चें के एक-एक मूवमेंट पर नजर रख सकते है। ये सब अल्ट्रासाउंड टेकनीक द्वारा संभव है। लेकिन क्या आप जानते है जिस टेक्नोलॉजी का फायदा उठाते हुए पेरेंटस गर्भ में ही अपने बच्चे की पल-पल की खबर लेते है, उसके बारे में अब काफी सवाल उठ रहे है।

क्या प्रेग्नेंसी टाइम में बार-बार अल्ट्रासाउंड करवाना ठीक है और क्या बच्चे के लिए सुरक्षित हैं? क्या अल्ट्रासाउंड तकनीक सुरक्षित है? क्या इसका बच्चों के विकास पर कुछ प्रभाव पड़ा है? इस तरह के कई सवाल जब लोगों के मन में आये तो इन सवालों का जवाब ढूंढने के लिए शोधकर्ताओं ने रिसर्च शुरु करदी। रिसर्च में मौजूद ऐसे बच्चे भी थे, जिनका पांच बार अल्ट्रासाउंड किया गया था। और रिसर्च में ये पता चला कि ‘अल्ट्रासाउंड का बच्चों के विकास, बातचीत का ढंग, व्यवहार आदि पर किसी तरह का कोई असर नहीं पड़ता है। हालांकि, भ्रूण पर इसका असर जरूर पड़ता है।’

वहीं इन सवालों का जवाब देते हुए कुछ विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भावस्था के पहले 18 सप्ताह में अगर बार-बार अल्ट्रासाउंड किया जाए तो भ्रूण पर इसका बहुत मामूली सा असर पड़ता है। लेकिन शोध के दौरान बच्चों के विकास पर इसका कोई असर नजर नहीं आया।

एक्सपर्ट्स बताते है कि अल्ट्रासाउंड करवाना हर गर्भवती महिला के लिए जरूरी होता है। क्योंकि इसकी मदद से ही डॉक्टर्स महिला और उसके गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर पैनी नजर रख सकते हैं। वैसे सामान्य प्रेग्नेंसी में दो अल्ट्रासाउंड करने का सुझाव दिया जाता है। पहला अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था की पहली तिमाही में किया जाता है, जबकि दूसरा अल्ट्रासाउंड दूसरी तिमाही के आखिरी चरण में होता है।
प्रेग्नेंट महीलाओं को कितनी बार अल्ट्रासाउंड करवाना चाहिए-
इस सवाल पर एक्सपर्ट्स ने बताया कि गर्भवती महिला का शारीरिक स्वास्थ्य यह तय करता है कि उसे कितने अल्ट्रासाउंड की जरूरत है। हालांकि अधिकतम तीन से चार अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है। ज्यादा अल्ट्रासाउंड करवाने को लेकर एक्सपर्ट्स भी मना करते है।

भ्रूण की स्थिति ज्यादा खराब होने पर अल्ट्रासाउंड के लिए कहा जा सकता है। खैर इन सब के बीच रिसर्च के दौरान ये बात साबित हो चुकी है कि अल्ट्रासाउंड की वजह से भ्रूण के विकास पर किसी तरह का कोई असर नहीं पड़ता है। यहां तक कि जन्म के बाद भी बच्चे का विकास, सोचने-समझने की क्षमता, आध्यात्मिक समझ, बातचीत के तौर तरीके आदि में भी किसी तरह का कोई प्रभाव नजर नहीं आता है। इतना ही नहीं अल्ट्रासाउंड की वजह से बच्चे में किसी तरह की कोई गंभीर बीमारी भी नहीं होती। आखिर में सभी सवालों के जवाब से ये पता चलता है कि अल्ट्रासाउंड तकनीक गर्भवती महिला के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।