जब आपका दिल सामान्य अवस्था में नहीं धड़क कर धीरे धीरे और असामान्य तरीके से धड़कता है उस अवस्था को हार्ट में ब्लॉकेज होना कहते है और यह एक बेहद ही गंभीर बीमारी है।
वैसे तो यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन 30 साल की उम्र के बाद इसका ख़तरा बढ़ जाता है और लोग इस बीमारी से बहुत घबराते है क्योंकि इसके इलाज़ में बहुत पैसा खर्च हो जाता है।
ये बहुत ज़रूरी है कि हार्ट के अंदर ब्लड सर्कुलेशन अच्छा हो वही जो ब्लॉकेज हुआ है वो निकल जाए तो इसका सबसे अच्छा समाधान है लौकी का जूस, इसको पीने से रक्त संचार सुधरता है वही अर्जुन की छाल का सेवन भी लाभकारी रहेगा।
इसके अलावा कपालभाती और अनुलोम विलोम प्राणायाम भी आधा आधा घंटा शुरू कर दे।। इससे आपको ब्लॉकेज के बाद भी ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं पड़ने वाली है।
स्वामी जी कहते है कि शरीर में ब्लड सर्कुलशन अच्छा रहना बहुत ज़रूरी है, इसके लिए योग में अलग अलग प्रकार के प्राणायाम बताये गए है जिनको करने से इसमें फायदा मिलता है।
दिल से जुड़ी किसी भी बीमारी के समाधान में अनार का रस भी बेहद लाभकारी है। अनार में फाइटोकेमिकल्स होता है और यह एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में धमनियों की परत को नुकसान नहीं होने देता है।
इसके अलावा लहसुन का सेवन भी ह्रदय में होने वाले रक्त संचार को दुरुस्त करता है, रोज़ 4 से 5 कली लहसुन की खानी चाहिए। वही रोज़ चार से पांच किलोमीटर की सैर भी करनी चाहिए।
औषधीय महत्व में अर्जुन वृक्ष की छाल और फल का अत्यधित उपयोग होता है। अर्जुन की छाल में करीब 20-24% टैनिन पाया जाता है।
छाल में बीटा-सिटोस्टिरोल, इलेजिक एसिड, ट्राईहाइड्रोक्सी ट्राईटरपीन, मोनो कार्बोक्सिलिक एसिड, अर्जुनिक एसिड आदि भी पाए जाते हैं।
आप 10 से 15 ग्राम ताज़ी अर्जुन की छाल को कूटकर 200 से 300 मिलीलीटर पानी में डालकर उबाले और एक चौथाई पानी जब रह जाए तो उसे छानकर और उसमे दूध मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।