इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानपुर के पूर्व सपा विधायक इरफान सोलंकी को आगजनी मामले में राहत देते हुए जमानत तो मंजूर कर दी है, लेकिन सात साल की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इससे इरफान सोलंकी की विधायकी बहाल नहीं हो सकेगी, और कानपुर की सीसामऊ सीट पर उपचुनाव का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है मामला?
सीसामऊ विधानसभा सीट से सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी को एमपी-एमएलए कोर्ट ने आगजनी मामले में सात साल की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी को स्वीकार कर लिया है, लेकिन सजा पर रोक न लगाने का फैसला सुनाया। इस निर्णय से 20 नवंबर को सीसामऊ सीट पर उपचुनाव सुनिश्चित हो गया है, और अब इरफान सोलंकी की विधायकी बहाल नहीं होगी।
सरकार की अपील और हाई कोर्ट का रुख
इस मामले में यूपी सरकार ने सोलंकी की सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास की मांग की है, जिस पर आगे सुनवाई होगी। कोर्ट ने इरफान सोलंकी को दोषी करार दिए जाने और ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे उनकी विधानसभा सदस्यता भी बहाल नहीं हो सकेगी।
उपचुनाव पर असर
हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद सीसामऊ सीट पर उपचुनाव का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। अब 20 नवंबर को तय समय पर ही सीसामऊ सीट के लिए वोटिंग होगी, और इरफान सोलंकी की गैर-मौजूदगी के बावजूद इस सीट पर चुनाव प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा।