देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पानी से मौतों के मामले ने सियासी तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे पर एक मीडियाकर्मी के सवाल से नाराज हुए नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद उन्होंने अपने शब्दों पर खेद जताया। वहीं, जब मंत्री पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने भागीरथपुरा पहुंचे, तो स्थानीय लोगों ने उनका विरोध किया।
दरअसल, भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से 13 लोगों की मौत का दावा सामने आया है, हालांकि प्रशासन इस आंकड़े से इनकार कर रहा है। इसी मामले को लेकर बुधवार शाम शहर पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों की बैठक ली, जिसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी मौजूद थे। बैठक के बाद बाहर निकलते समय एक रिपोर्टर ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज के खर्च के रिफंड को लेकर सवाल किया, जिस पर मंत्री नाराज हो गए और कह दिया-“फोकट सवाल मत करो।” इसके बाद बात बढ़ गई और मंत्री द्वारा कहे गए शब्दों का वीडियो वायरल हो गया।
घटना के बाद मंत्री विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया के जरिए अपने शब्दों पर खेद व्यक्त किया। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेर लिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि ऐसे “अमर्यादित व्यवहार” करने वाले मंत्री से नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और प्रभारी मंत्री-तीनों जिम्मेदार हैं।
गुरुवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जब भागीरथपुरा पहुंचे और दूषित पानी से जान गंवाने वालों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा चेक सौंपने लगे, तो वहां मौजूद लोगों ने विरोध जताया। रहवासियों और परिजनों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। बाद में समझाइश के बाद परिजनों ने चेक स्वीकार किए। इस दौरान मंत्री ने कहा कि इस घटना के दोषी चाहे जो भी हों, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
दूषित पानी मामले की जांच के लिए कांग्रेस ने पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, जयवर्धन सिंह, बदनावर विधायक भंवर सिंह शेखावत, तराना विधायक महेश परमार और सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल शामिल हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए, पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और घायलों को निशुल्क व बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए।