करवा चौथ: पति और पत्नी के प्यार को दर्शाने वाला ये त्योहार इस साल 4 नवंबर को मनाया जाएगा। खासतौर पर उत्तरी भारत में महिलाएं हर साल इस दिन को धूमधान से मनाती है, वहीं कई कपल्स के लिए ये पहला करवा चौथ होगा। तो आज RNI न्यूज़ पर इस व्रत की तमाम जानकारी देते हैं..
कब मनाया जाता है करवा चौथ
कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ व्रत रखा जाता है। इस दिन सुहागिनें पति की लंबी आयु की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। करवा चौथ व्रत को चांद को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। इस साल करवा चौथ व्रत 4 नवंबर को है।

करवा चौथ की पूजन साम्रगी
छलनी, मिट्टी का टोंटीदार करवा और ढक्कन रूई की बत्ती, धूप या अगरबत्ती, फल, फूल, मिठाईयां, कांस की तीलियां, करवा चौथ कैलेंडर, रोली, अक्षत, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी के 5 डेले, आटे का दीया, दीपक, सिंदूर, चंदन, कुमकुम, शहद, चीनी, लकड़ी का आसन, जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, देसी घी, आठ पूरियों की अठावरी, हलवा और दक्षिणा।
करवा चौथ शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, काशी में या आसपास में चंद्रोदय समय रात में लगभग 7:57 बजे होगा। इसके बाद नंगी आंखों से चंद्रमा दिखाई पड़ने पर अर्घ्य देकर परम्परागत तरीके से इस व्रत पर्व को मनाया जाता है। 4 नवंबर को शाम 05 बजकर 34 मिनट से शाम 06 बजकर 52 मिनट तक करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त है।
चंद्रोदय : रात 7:57 बजे होगा
शाम 05 बजकर 34 मिनट से शाम 06 बजकर 52 मिनट तक।

करवा चौथ के दिन ज्वेलरी खरीदने से क्या होता है
करवा चौथ के दिन ज्वेलरी खरीदना शुभ और अशुभ नहीं होता, इस दिन पति अपनी पत्नी को उपहार के तौर पर सोना या चांदी देते है। जिससे उनके बीच प्यार का इस्थिप खड़ा होता है।
सुहागिन महिलाओं के लिए साल का सबसे बड़ा पर्व करवा चौथ व्रत है. इस दिन का वे पूरे साल इंतजार करती हैं. करवा चौथ व्रत का हिंदू धर्म में भी विशेष महत्व है. इस व्रत को पति की लंबी उम्र की कामना से रखा जाता
करवा चौथ का महात्व, कैसे पूरा होता है व्रत?
करवा चौथ व्रत का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है। करवाचौथ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है।’करवा’ यानी ‘मिट्टी का बरतन’ और ‘चौथ’ यानि ‘चतुर्थी’. इस त्योहार पर मिट्टी के बरतन यानी करवे का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सबसे अहम व्रत माना जाता है।
करवा चौथ के दिन महिलाएं बड़े ही श्रद्धा भाव से शिव-पार्वती की पूजा करती हैं. इस दिन व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश के साथ चांद की भी पूजा की जाती है। करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के मजबूत रिश्ते, प्यार और विश्वास का प्रतीक है। यही नहीं कुंवारी लड़कियां भी मनवांछित वर के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। करवा चौथ का पावन व्रत हर साल कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन रखा जाता है और ऐसे में इस साल करवा चौथ व्रत 04 नवंबर 2020 को रखा जाएगा।