भारत देश वह देश है जहां पर सिस्टम चाहे जितनी ही भ्रष्ट क्यों ना हो मगर आज भी हमारे देश की न्याय पालिका पर लोगों को पूरा भरोसा बना हुआ है। न्याय पालिका सच्चाई की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसा ही एक न्यायिक फैसला इन दिनों लोगो के बीच चर्चा में है कि कैसे प्रदेश के एक सीनियर आईपीएस को आय से अधिक संपत्ति और राजद्रोह के मामले में षड्यंत्र रचकर फंसाने की कहानी गढ़ी गई।
खबर छत्तीसगढ़ के सीरियर आईपीएस जीपी सिंह के बारे में है, जहां पर उन्हें राजद्रोह के मामले में फसाकर हक़ीकत को वर्षों सबसे दूर रखा गया। लेकिन अब हाईकोर्ट ने बुधवार को उनके खिलाफ दर्ज तीनों FIR को रद्द कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की बेंच ने ये आदेश दिया जिस से अब उन्हें बड़ी राहत मिली है।

जुलाई 2021 में GP सिंह के सरकारी आवास और अन्य ठिकानों पर जब छापा पड़ा तो ये बात सामने आई कि वो कुछ प्लानिंग कर रहे थे। इसे ही आधार बनाकर उन पर राजद्रोह का केस किया गया था। इसमें आरोप लगाया गया कि सस्पेंड किए गए ADG सिंह सरकार के खिलाफ वे साजिश रच रहे थे। विधायकों और अफसरों के खिलाफ भी डायरी में बातें मिली थीं। जिसके बाद जीपी सिंह पर छत्तीसगढ़ सरकार ने राजद्रोह का केस दर्ज किया था। इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।
जीपी सिंह को फसाने के लिए कैसे स्टेट बैंक के अधिकारी मणिभूषण को जबरदस्ती मोहरा बनाया गया इस षड्यंत्र में कहानी गढ़ा गया कि यह अधिकारी आईपीएस जीपी सिंह के संपत्तियों का सारा लेखा-जोखा संभालते है जबकि सत्य यह है कि मणिभूषण का उक्त मामले से दूर दूर तक का वास्ता नही है। इसकी हकीकत मणिभूषण के न्यायालय में दिए बयान से स्पष्ट होती है।

मणिभूषण ने अपने बयान में बताया कि जुलाई 2021 में ACB डीआईजी आरिफ शेख , ACB में पदस्थ सपन चौधरी पर बैंक अधिकारी ने शारीरिक और मानसिक प्रताणना का आरोप लगाया था। इसके साथ ही पूरे घटनाक्रम के दौरान एक बैंक अधिकारी की स्कूटी में सोना प्लांट किया गया और उन पर थर्ड डिग्री के साथ-साथ पास्को एक्ट के तहत जेल भेजने की धमकी दी गई। आगे उन्होंने बताया कि आधिकारियों ने बैंक अधिकारी पर अनैतिक दबाव बनाकर उनसे कहा कि स्कूटी से कथिततौर पर जब्त सोना जीपी सिंह है बताना।
मणिभूषण ने आगे कहा कि अधिकारियो ने कहा था कि हमारे हिसाब से अगर बयान नहीं दिया तो तुम्हारा जीवन दूभर कर देंगे। इस तरह की धमकियों के बाबजूद मणिभूषण सत्य के साथ रहे, आख़िरकार सत्य की जीत होती ही है। जीपी सिंह ने अपने खिलाफ दर्ज सभी FIR को चुनौती दी थी। उन्होंने हाईकोर्ट में एडवोकेट हिमांशु पांडेय के जरिए याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि, तत्कालीन सरकार ने उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फंसाया है। किसी में कोई साक्ष्य नहीं हैं। इस दौरान हाईकोर्ट ने माना कि उन्हें परेशान करने के लिए बिना सबूतों के FIR दर्ज की गई थी। इनमें एक भी केस चलने लायक नहीं है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अब तीनों FIR को रद्द करने का आदेश दिया है।

1994 बैच के आईपीएस अधिकारी जीपी सिंह के 2012 में ACB ने करवाई की थी। फिलहाल बिलासपुर से जीपी सिंह को बड़ी राहत मिली है उनके ख़िलाफ तीनो केश को हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है और अब उन्हें फिर से बहाल करने का मामला दिल्ली हाईकोर्ट में चैल रहा है जिसकी सुनवाई सितंबर में होगी।