रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करने के दौरान छ: स्तंभो की बात की है। जिसमें उन्होनो पहले स्तंभ के तौर पर स्वास्थ्य और कल्याण को रखा है। आपको बता दें कि कोराना महामारी से भारत ही नहीं दुनिया की आर्थिक ताकत कमजोर हुई है। जिसके बाद दुनिया की सरकारों ने जन कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता देना प्रारंभ कर दिया है।
भारत ने भी इस साल के आम बजट में स्वास्थ्य और कल्याण को पहले नंबर पर रखकर यह बताने की कोशिश की है, कि महामारी से न सिर्फ लडेंगे बल्कि जन कल्याण के लिए हमेशा अग्रसर रहेंगे। वित्तमंत्री ने बजट पेश करते वक्त कहा कि “जिस तरह से इस बार बजट बनाया गया वैसा पहले कभी नहीं हुआ, ये एक बड़ी चुनौती थी। पिछली बार जब हम बजट पेश कर रहे थे तब ये पता नहीं था कि ग्लोबल इकॉनमी कहां जाने वाली है। हमने ये कल्पना नहीं की थी कि हम हेल्थ संकट की तरफ बढ़ रहे हैं”।
आगे उन्होने कहा कि हमारे पास आज दो वैक्सीन मौजूद हैं। 100 से ज्यादा देशों को इसका फायदा मिल रहा है। दो से ज्यादा वैक्सीन और आने वाले हैं। भारत “लैंड ऑफ होप” की तरह देखा जाएगा। वहीं उन्होने नये योजनाओं के बारे में कहा कि पीएम आत्मनिर्भर स्वास्थ्य योजना शुरू की जायेगी। इस योजना पर सरकार 61 हजार करोड़ रुपए आने वाले 6 सालों में खर्च करेगी। जबकि नई बीमारियों पर फोकस होगा। 75 हजार ग्रामीण हेल्थ सेंटर खोले जायेंगे, और 602 ब्लाकों में क्रिटिकल केयर अस्पताल बनेंगे।,
रोकथाम बचाव के लिए वित्तमंत्री ने कहा कि बिमारियों पर रोकथाम सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य है। देश में 15 हेल्थ इमरजेंसी सेंटर्स का गठन किया जाएगा। सरकार ने कोरोना टीकाकरण के लिए 35 हजार करोड़ रुपए दिए हैं। ये बजट “आपदा में अवसर” की तरह है। हम 100 देशों को वैक्सीन दे रहें है। वहीं इस साल के स्वास्थ्य के लिए सरकार ने 64180 करोड़ रुपये खर्च करने का एलान किया है।