जितेंद्र शर्मा की कलम से { संपादक RNI न्यूज़ }
कहते है की आवश्यकता अविष्कार की जननी होती है और यह काफी हद तक सही भी है। पाषाण युग के मानव और आज के मानव में दिन रात का अंतर है और उसका कारण है सतत सभ्यता का विकास।
जब सभ्यता का विकास होता है तो उसके साथ साथ मनुष्य का भी विकास होता है और उसी के साथ होते है नित नए आविष्कार।
बिजली, सड़क, हवाई जहाज ये वो चीज़े है जिन्होनें आपके कार्य को सुगम और आसान बना दिया। जिस चिट्ठी को कहीं पहुंचने में 7 दिन लग जाते थे वो आज 7 सेकंड में पहुंच जाती है।
इसे आपका विकास कहा जाएगा। इसी से मानव महान बनता है वरना वो जानवर ही रहता ! लेकिन ऐसे कई लोग है जो विकास को विनाश के हथियार के रूप इस्तेमाल करते है।
ये ना सिर्फ समाज के दुश्मन होते है बल्कि इनसे निपटने में समय और धन दोनों की हानि होती है और इनसे से एक है सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर समाज में वैमनस्य और टकराव पैदा करने वाले लोग।
सोशल मीडिया का सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूप से समाज पर प्रभाव पड़ता है।
उदाहरण के लिए इस कोरोना जैसी महामारी के संकट मे एक व्यक्ति वो है जो तकनीक का इस्तेमाल ये पता लगाने में कर रहा है की कहीं कोई भूखा तो नहीं है ! चलो उसे खाना खिलाये जाए।
वही कोई व्यक्ति ऐसा भी है जो इसका इस्तेमाल समाज में जहर घोलने के लिए कर रहा है। जो दुसरा व्यक्ति है वो इस समाज और पुलिस दोनों के लिए शत्रु है।
एक तरफ वो समाज की एकता के लिए खतरा है दूसरी और वो पुलिस का काम बढ़ा रहा है जिसके पास पहले से बहुत काम है।
अब उनसे निपटने का ज़िम्मा उठा लिया है मुरादाबाद के एसएसपी अमित पाठक ने, यूपी एसटीफ से लेकर एसएसपी तक, पाठक एक ऐसे आईपीएस है जिनका सौ फीसदी ट्रैक रिकॉर्ड है।
वो जहां जाते है वहां की जनता चैन की नींद सोती है और अपराधी या तो खुद को उनके हवाले कर देते है या जनपद छोड़ देते है।
समाज के इन अदृश्य दुश्मनों से लड़ाई लड़ने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया लैब बनायीं है जिसमें डिजिटल वालिंटियर्स काम कर रहे है।
ये लोग सभी जिलों की फेसबुक और इंस्टाग्राम पर होने वाली सभी गतिविधियों पर नज़र रखेंगे और विवादित पोस्ट पर तुरंत कार्यवाही होगी।
बदलते समय की मांग है की अब समाज के दुश्मन जिस तरह हथियार से नहीं बल्कि अफवाह से समाज को खोखला कर रहे है उसी तरह उनको करारा जवाब देने के लिए अब पुलिस भी तरीके बदले।