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बढ़ते हमलों को देखते हुए वकीलों की सुरक्षा के लिए कानून का ड्राफ्ट तैयार, पांच साल की सजा, 10 लाख तक का जुर्माना

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नई दिल्ली: देश में वकीलों की सुरक्षा को देखते हुए अब कानूनी हल ढूंढने की कोशिश की जा रही है। इस मामले में कानून लाया जा रहा है। वकीलों की सुरक्षा और संरक्षा के विधेयक के मसौदे को अब ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ ने सभी स्टेक होल्डर्स की राय के लिए सार्वजनिक कर दिया है। 9 जुलाई तक इस पर राय, सुझाव और प्रतिक्रिया दी जा सकती है।

आपको बता दें कि हाल के वर्षों में वकीलों पर हमले बढ़ते ही जा रहे हैं। हमलों की बढ़ती घटनाओं के को देखते हुए सात विशेषज्ञों की कमेटी ने बिल का खाका तैयार किया है। कमेटी में सीनियर एडवोकेट और वकीलों से जुड़े संस्थानों और संगठनों के कई अनुभवी पदाधिकारी हैं।

इस बिल पर देश भर के वकीलों, उनसे जुड़े संस्थानों और संगठनों की प्रतिक्रिया, सुझाव और बदलाव के प्रस्ताव प्राप्त किए जाएंगे। काउंसिल बिल के मसौदे में समुचित बदलाव के बाद इसे विधि और न्याय मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। इसके बाद इसको संसद के पटल पर रखा जाएगा। उम्मीद है कि 19 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के सत्र में इसे चर्चा के लिए पेश किया जाएगा।

बिल के मसौदे में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान कोर्ट के अधिकारी के रूप में अपनी ड्यूटी निभाने के दौरान वकील पर हमले के दोषियों को छह महीने से लेकर पांच साल तक कैद की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा वकील से बदला लेने के लिए, उसके खिलाफ झूठी शिकायत, मुकदमे या कार्रवाई के मामले में पीड़ित वकील को दो से दस लाख रुपए मुआवजा देने का भी प्रावधान है।

आपको बता दें कि केंद्र सरकार से नियम बनाने को भी कहा है कि जांच या अभियोजन एजेंसी के वकीलों पर दबाव न डाला जाय। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारें सुनिश्चित करें कि वकीलों को महामारी और प्राकृतिक आपदा के दौरान सामाजिक सुरक्षा और संरक्षा भी मुहैया कराई जाय।

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