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शिवपुरी में दुग्ध व्यापारी संघ ने दूध खरीद-बिक्री के लिए वैज्ञानिक जांच प्रणाली लागू करने की मांग उठाई

शिवपुरी में दुग्ध व्यापारी संघ ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दूध की खरीद-बिक्री को फैट और एसएनएफ आधारित वैज्ञानिक जांच प्रणाली से कराने की मांग की है। संघ ने मावा रिकवरी के आधार पर दूध खरीदने की प्रथा पर रोक, एफएसएसएआई पंजीयन और अमानक दूध बेचने वालों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।

By: Nivedita 
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शिवपुरी में दुग्ध व्यापारी संघ ने दूध खरीद-बिक्री के लिए वैज्ञानिक जांच प्रणाली लागू करने की मांग उठाई

शिवपुरी में दुग्ध व्यापारी संघ ने दूध की खरीद और बिक्री प्रक्रिया को वैज्ञानिक मानकों के आधार पर संचालित करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। संघ ने दूध की गुणवत्ता जांच के लिए फैट और एसएनएफ (Solid Not Fat) आधारित प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की है।

मावा रिकवरी के आधार पर खरीद का विरोध

दुग्ध व्यापारी संघ का आरोप है कि जिले के कुछ दुग्ध उत्पादकों द्वारा फैट और एसएनएफ जांच प्रणाली का पालन नहीं किया जा रहा है। संघ के अनुसार, कई स्थानों पर मावा (खोया) रिकवरी के आधार पर दूध खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिससे डेयरी संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

फैट और एसएनएफ जांच को बताया जरूरी

संघ अध्यक्ष एडवोकेट राजकुमार शाक्य ने ज्ञापन में कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 और एफएसएसएआई के नियमों के अनुसार दूध की गुणवत्ता का निर्धारण फैट और एसएनएफ जांच के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में इन मानकों की अनदेखी के कारण गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

 

प्रशासन से नियमों के पालन की मांग

दुग्ध व्यापारी संघ ने जिला प्रशासन से मांग की है कि दूध का क्रय-विक्रय केवल फैट और एसएनएफ आधारित जांच प्रणाली के अनुसार कराया जाए। इसके साथ ही मावा रिकवरी के आधार पर दूध खरीदने की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।

दूध उत्पादकों और संग्रहकर्ताओं के पंजीयन पर जोर

ज्ञापन के माध्यम से संघ ने सभी दूध उत्पादकों और संग्रहकर्ताओं का एफएसएसएआई के तहत अनिवार्य पंजीयन कराने की मांग रखी। संघ का कहना है कि इससे दूध की गुणवत्ता और आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता लाई जा सकेगी।

अमानक दूध पर कार्रवाई की मांग

दुग्ध व्यापारी संघ ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से दूध के नमूने लेकर जांच कराने की मांग की है। साथ ही अमानक दूध की बिक्री करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सख्त कार्रवाई की अपील की गई है।

 

रिपोर्ट – कुलदीप गुप्ता

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