रिपोर्ट: गीतांजली लोहनी
नई दिल्ली: हमारे देश में कई घरों में देसी घी का तड़का हर चीज़ में लगाया जाता है। देखा जाए तो देसी घी सेहत के लिहाज से भी काफी फायदेमंद माना जाता है। लेकिन आजकल बाजार मे कई घी मिलावट वाले आने लगे है, जो हमारे सेहत में काफी प्रभाव डालते है। तो अगर आप भी देसी घी खाने के शौकीन है तो थोड़ा सावधान हो जाए क्योंकि बाजार में मिलावट का कारोबार काफी बढ़ गया है। मिलावटी घी इस तरह शरीर पर प्रभाव डालता है कि इससे कैंसर जैसी कई घातक बीमारियां हो सकती हैं। तो चलिए आज जानते हैं बाजार के मिलवटी घी की पहचान कैसे करें और ये हमारे शरीर में कैसे नुकसान पहुंचाता है।

बाजार में मिलने वाला नकली घी हमारी बॉडी को 10 गुना ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है। तो ऐसे में घी खरीदते समय आपको बेहद सावधानी बरतनी चाहिए।
बता दें कि मिलावटी देसी घी तैयार करने के लिए 40 प्रतिशत रिफाइंड ऑयल और 60 प्रतिशत फार्चून वनस्पति को मिलाया जाता है। इसके अलावा उबला हुआ आलू और कोलतार डाई का भी उपयोग किया जाता है। कैडमियम एक विषैला कैमिकल है, जो कई नकली घी मिलाया जाता है, इसके सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है। इससे महिलाओं में गर्भपात की शिकायत भी होती है। साथ ही पेट संबंधित परेशानी भी हो सकती है।
कैसे करें असली नकली घी की पहचान-
देसी घी की पहचान के लिए हाथ को उल्टा कर इसको अपनी हथेली में रगड़ें। अगर घी में दाने आएं तो समझ जाएं यह नकली है। अगर घी असली होगा तो ये स्किन में अब्जॉर्ब हो जाएगा।
इसके अलावा एक चम्मच घी में चार-पांच बूंदें आयोडीन की मिलाएं। अगर रंग नीला हो जाता है तो समझ जाए कि घी के अंदर मिलावट है। इसमें रंग और टेक्सचर लाने के लिए उबले आलू का इस्तेमाल किया गया है।
तो वहीं एक चम्मच घी में एक चम्मच हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एक चुटकी चीनी मिलाएं। अगर घी का रंग लाल हो जाए तो इसमें डालडा की मिलावट की गई है।

इसके अलावा थोड़ा घी हाथों में रगड़ें। इसे करीब 15 मिनट बाद सूंघकर देखें, अगर खुशबू आनी बंद हो जाए तो मान लीजिए कि यह मिलावटी घी है।
कैमिकली आप घी की पहचान ऐसे कर सकते है। 100 मिली घी में फरफ्यूरल (Furfural) और हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एल्कोहल मिलाकर मिक्स करें। 10 मिनट बाद अगर इसका रंग लाल हो जाता है तो समझ जाएं कि इसमें तिल्ली के तेल की मिलावट है।