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विकास दुबे की गिरफ़्तारी पर राजनीति कितनी सही !

By: RNI Hindi Desk 
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विकास दुबे की गिरफ़्तारी पर राजनीति कितनी सही !

जितेंद्र शर्मा { एडिटर इन चीफ }

2 जुलाई की रात को कानपुर में आठ पुलिसकर्मियो की ह्त्या का आरोपी विकास दुबे आख़िरकार आज एमपी के उज्जैन में पकड़ा गया है।

गैंगस्टर विकास ने वीवीआईपी दर्शन के लिए पर्ची कटवाने के बाद प्रसाद की एक दुकान पर पहुंचकर अपना बैग रखा। बैग रखने के बाद वह महाकाल मंदिर के एक नंबर गेट से पर्ची दिखाकर दाखिल हुआ।

अंदर जाने के दौरान एक सिक्योरिटी गार्ड को शक हुआ तो उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखे। इस दौरान विकास आराम से मंदिर प्रांगण में घूमता रहा।

पुलिस उसकी लोकेशन देखकर मंदिर के अंदर दाखिल हुई और उसे हिरासत में ले लिया। कल फरीदाबाद में दिखाई दिया विकास कैसे एक दिन में उज्जैन पहुंच जाता है ये बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है।

लेकिन जो सबसे दुःखद है वो है इस पुरे मामले में राजनीति का होना, दरअसल विकास की गिरफ्तारी कई नेताओं को सरेंडर लग रही है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि आरोपी का उज्जैन पहुंचना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, यूपी सरकार को मामले की सीबीआई जांच करा सभी तथ्यों और प्रोटेक्शन के ताल्लुकातों को जगजाहिर करना चाहिए।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेख यादव ने विकास दुबे की गिरफ्तारी को लेकर कहा, ‘खबर आ रही है कि ‘कानपुर-कांड’ का मुख्य अपराधी पुलिस की हिरासत में है। अगर ये सच है तो सरकार साफ करे कि ये आत्मसमर्पण है या गिरफ्तारी।

इसके अलावा कांग्रेस ने एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर भी सवाल उठाये है। कांग्रेस का कहना है की विकास दुबे कानपुर का रहने वाला है और नरोत्तम मिश्रा लोकसभा चुनावों में कानपुर के प्रभारी थे और फिलहाल उज्जैन के प्रभारी है। कांग्रेस अब विकास दुबे की गिरफ़्तारी में भी सियासत कर रही है।

विकास दुबे पूछताछ में क्या खुलासे करेगा ये तो सबको पता चल ही जाएगा लेकिन फिलहाल अगर इस मामले पर राजनीति नहीं हो वही बेहतर रहेगा।

आपको बता दे, उत्तर प्रदेश में कानपुर जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में पुलिसकर्मियों पर गोलियां बरसाने वाला हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे 14 साल पहले सहारनपुर में गिरफ्तार हुआ था।

पुलिस ने तब उसके पास से मादक पदार्थ बरामद करते हुए उसके खिलाफ नारकोटिक्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

जनकपुरी थाना पुलिस ने एसबीडी जिला अस्पताल के चौराहे के पास से 25 जून 2006 को विकास दुबे को गिरफ्तार किया था। उसके पास से पांच किलो डोडा पोस्त बरामद हुआ था। उस समय अमिताभ यश सहारनपुर एसएसपी थे, जो अब एसटीएफ में हैं।

जनकपुरी थाने पर विकास दुबे से एसएसपी ने पूछताछ की थी। तब उसकी लंबी आपराधिक लिस्ट सामने आई थी। उस समय भी विकास पर करीब 50 मुकदमे दर्ज थे।

पुलिस ने विवेचना पूरी करने के उपरांत अगस्त 2006 में चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी थी। अधिवक्ता नीरज तिवारी ने बताया कि विकास दुबे की जमानत हमने कराई थी, लेकिन उसके बाद मुकदमे में क्या हुआ, उन्हें पता नहीं है।

राजनाथ सरकार में मंत्री रहे संतोष शुक्ला की हत्या के मामले में नाम आने पर विकास दुबे पर 50 हजार का इनाम घोषित हुआ था। हालांकि उस मामले में वह अदालत से बरी हो गया था।

इसलिए इन सब मामलों में अब वहीं सवाल खड़े हो रहे है कि एक ऐसे आपराधिक आदमी को जमानत कैसे मिल गई ? ऐसे में उस जज पर भी सवाल खड़े होते है जिसने उन्हें जमानत दी थी।

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