1. हिन्दी समाचार
  2. देश
  3. हिंदू महिला डॉक्टर ने मुस्लिम महिला मरीज को आखिरी वक्त में सुनाया ‘कलमा’, सुनते ही मरीज की हुई मौत

हिंदू महिला डॉक्टर ने मुस्लिम महिला मरीज को आखिरी वक्त में सुनाया ‘कलमा’, सुनते ही मरीज की हुई मौत

By RNI Hindi Desk 
Updated Date

रिपोर्ट: सत्यम दुबे

तिरुवनंतपुरम: कोरोना महामारी के दूसरे लहर का कहर लगातार जारी है। कोरोना से संक्रमित मरीज ऑक्सीजन और दवाईयों की कमीं से लगातार दम तोड़ रहें हैं। महामारी के दूसरे लहर ने कई हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर दिया है। महामारी के इस भयावह दौर में डॉक्टर ही दूसरे भगवान बनें हैं, और लोगों की जान बचाने के लिए खुद की भी परवाह नहीं कर रहें हैं। केरल से एक हिंदू महिला डॉक्टर के मानवता की ऐसी खबर सामने आई है, जिसे जान आप भी सराहना करने से नहीं चूकेंगे।

आपको बता दें कि डॉ रेखा कृष्णा पलक्कड के पट्टांबी में एक प्राइवेट अस्पताल में कोविड मरीजों का इलाज कर उनकी जान बचाने में जुटी हैं। सेवाना हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती एक मुस्लिम महिला की कोरोना के साथ निमोनिया से भी पीड़ित होने से हालत नाजुक थी। महिला को दो हफ्ते पहले अस्पताल में भर्ती किया गया था। वो ICU में भर्ती थी, कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल की वजह से मरीज के रिश्तेदारों को पास जाने की अनुमति नहीं थी। 17 मई तक मरीज की तबीयत काफी बिगड़ गई और अहम अंगों ने काम करना बंद कर दिया।

इसके बाद अस्पताल की ओर से फैसला किया गया कि मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट से हटा दिया जाए। मरीज की हालत ऐसी हो चुकी थी कि डॉक्टर्स कुछ ज्यादा नहीं कर सकते थे। मरीज के परिजनों को इस बारे में सूचित कर दिया गया। उस समय डॉ रेखा कृष्णा मरीज के पास मौजूद थीं।

डॉ रेखा ने बताया कि, “मरीज का कोई रिश्तेदार पास मौजूद नही था, मुझे लगा कि उनके (मरीज) के लिए कुछ किया जाना चाहिए। क्योंकि मेरा बचपन संयुक्त अरब अमीरात में गुजरा है इसलिए मुझे मुस्लिम इबादत और रीतिरिवाजों की कुछ जानकारी है। उन्होने आगे बताया कि मैने धीरे से मरीज के कान के पास कलमा पढ़ा और आंखें बंद कीं। जैसे ही मैंने कलमा पूरा पढ़ा, मरीज ने गहरी सांस ली और मॉनिटर पर लाइन फ्लैट हो गई।”

आपको बता दें कि इस बात को डॉ रेखा ने किसी से जिक्र नहीं किया। उन्होने हॉस्पिटल में कार्यरत डॉ मुस्तफा को ही इसके बारे में जानकारी थी। डॉ मुस्तफा ने फेसबुक पर इसका जिक्र करते हुए पोस्ट लिखी। ये पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

डॉ रेखा ने बताया कि उनका जन्म केरल में हुआ लेकिन पालन-पोषण दुबई में हुआ। डॉ रेखा ने अपनी शिक्षा इंडियन एक्सेसिव फैकल्टी दुबई से की। उनके माता-पिता अभी भी दुबई में हैं। रिसर्च के मकसद से डॉ रेखा भारत आईं और केरल में ही बस गईं। उनके पति त्रिशूर में फिजिशियन हैं। डॉ रेखा का कहना है कि हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। वे यही संदेश लोगों को देना चाहती हैं।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर पर फॉलो करे...
RNI News Ads