नेपाल। हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने नेपाल और चीन के तिब्बत सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी है। 26 अगस्त को अचानक आए तेज जलप्रवाह और मलबे के सैलाब ने कई इलाकों में घरों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचाया। ताजा रिपोर्टों के अनुसार मृतकों की संख्या 160 से अधिक हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।
शुरुआत में इस प्राकृतिक आपदा के पीछे भूकंप को संभावित वजह बताया गया था। हालांकि, अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के विश्लेषण के मुताबिक जिस भूकंपीय गतिविधि को पहले भूकंप समझा गया था, वह वास्तव में ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद हुए मलबे के प्रवाह से जुड़ी थी। इस घटना ने नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचाया, जिसके बाद नीचे के क्षेत्रों में तबाही फैल गई।
बाढ़ का असर नेपाल के रासुवा समेत कई पहाड़ी इलाकों में देखने को मिला। तेज बहाव अपने साथ मिट्टी, चट्टान और अन्य मलबा लेकर नीचे आया, जिससे बस्तियां और महत्वपूर्ण ढांचा प्रभावित हुआ। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर नुकसान की खबर है।
आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल और तिब्बत क्षेत्र को मिलाकर एक हजार से अधिक लोगों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है। इनमें विदेशी नागरिक और पर्यटक भी शामिल हैं। नेपाल में कई विदेशी यात्रियों के संपर्क से बाहर होने की सूचना है।
बाढ़ और मलबे के तेज प्रवाह ने कई सड़कों और पुलों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। कुछ इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। दुर्गम पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राहत टीमों के लिए प्रभावित स्थानों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। कई जगहों पर हेलीकॉप्टर के जरिए राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
नेपाल में सुरक्षाबलों और राहत टीमों को बचाव अभियान में लगाया गया है। प्रभावित लोगों तक भोजन, आश्रय और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि दुर्गम क्षेत्रों में संपर्क बहाल होने के बाद नुकसान और लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पिघलने और उनसे जुड़े अचानक आने वाले बाढ़ के खतरे को गंभीरता से लेने की जरूरत है। ऐसी घटनाएं पहाड़ी क्षेत्रों में बेहद कम समय में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकती हैं।