भोपाल। मध्य प्रदेश में कथित तौर पर सामने आई करीब 600 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने मामले को गंभीर बताते हुए इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है। पार्टी ने जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराने की भी मांग रखी है।
कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि सरकारी धन के कथित तौर पर निजी बैंक खातों तक पहुंचने का मामला सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रकरण में करीब 59 विभाग जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। मुकेश नायक ने सवाल उठाया कि सरकारी बैंक खातों में बदलाव किस स्तर पर किया गया और डिजिटल वित्तीय व्यवस्था से जुड़े पासवर्ड और लॉगिन की जानकारी किन लोगों के पास थी।
कांग्रेस नेता ने करोड़ों रुपये के कथित संदिग्ध भुगतानों को लेकर जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि निर्णय लेने और निगरानी की जिम्मेदारी वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार से कथित वित्तीय गड़बड़ी के मामले में अब तक हुई रिकवरी का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी ने संदिग्ध बैंक खातों और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी भी विभागवार और तारीखवार सामने रखने की मांग की।
कांग्रेस ने कहा कि सरकारी धन से जुड़े इस मामले में पूरी पारदर्शिता जरूरी है। पार्टी का कहना है कि सरकारी खजाने से जुड़ी प्रत्येक राशि की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जांच के बाद जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल यह आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। मामले में सरकारी स्तर पर जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।