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17 वर्षीय नाबालिग को दादा-चाचा ने दी दर्दनाक मौत, कसूर केवल इतना था कि जींस पहन ली थी

यूपी की देवरिया से दिल दहला देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आपके भी होश उड़ जायेंगे। यहां एक नाबालिग लड़की को उसके दादा और चाचा ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार डाला।

By: RNI Hindi Desk 
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17 वर्षीय नाबालिग को दादा-चाचा ने दी दर्दनाक मौत, कसूर केवल इतना था कि जींस पहन ली थी

रिपोर्ट: सत्यम दुबे

देवरिया: यूपी की देवरिया से दिल दहला देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आपके भी होश उड़ जायेंगे। यहां एक नाबालिग लड़की को उसके दादा और चाचा ने पीट-पीटकर मौत के घाट उतार डाला। 17 वर्षीय नाबालिग की गलती केवल इतनी थी, कि वह जींस पहनना नहीं छोड़ रही थी। इस मामले में पुलिस ने 10 लोगो पर हत्या का मामला दर्ज किया है। जबकि दो आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया है।

यह सनसनीखेज मामला जिले के महुआडीह थानाक्षेत्र के सवरेजी खर्ग गांव का है। 17 साल की नेहा पासवान को उसके दादा-दादी और चाचा-चाची ने पीट-पीटकर मार डाला। नेहा की मां शकुंतला देवी का आरोप है कि दादा-दादी और चाचा-चाची ने नेहा को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया।

एक रिपोर्ट की मानें तो नेहा के पिता अमरनाथ पासवान लुधियाना में दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं और हादसे के दिन भी वह लुधियाना में ही थे। अमरनाथ पासवान दो बेटों और दो बेटियों के पिता हैं। अमरनाथ ने बताया कि, ‘अपने बच्चों के पढ़ने-लिखने और पहनने-ओढ़ने को लेकर कभी टोका-टाकी नहीं की। मैं हमेशा से चाहता था कि बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ें।’

मृतका नेहा अपने छोटे भाई विवेक के साथ घर से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित श्रीमति शांति देवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ती थी। उसने इस साल आठवीं की परीक्षा पास की थी और 9वीं क्लास में एडमिशन हुआ था। नेहा की मां शकुंतला देवी बताती हैं कि नेहा पढ़ने में काफी तेज थी और कहती थी कि वो पढ़-लिखकर दरोगा बनेगी। वह अपने परिवार की परेशानियों को दूर करना चाहती थी, लेकिन उसका यह सपना पूरा नहीं हो पाया।

नेहा की मां ने बताया कि, ‘नेहा ने सोमवार का व्रत किया था और उसने सुबह पूजा-पाठ किया। शाम को नहाने के बाद जींस-टॉप पहना और पूजा की। पूजा के समय तो किसी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसके बाद उसके दादा-दादी और चाचा-चाची ने जींस पहने को लेकर आपत्ति जताई। इस पर नेहा ने कहा कि सरकार ने जींस पहनने के लिए बनाया है, इसलिए मुझे पहनना है, पढ़ना लिखना है और समाज में रहना है।’

शकुंतला देवी ने आगे बताया, ‘इसके बाद नेहा के दादा-दादी ने कहा कि वे ना तो उसे जींस पहनने देंगे और ना पढ़ने देंगे। फिर दादा-दादी और चाचाओं-चाची ने मिलकर उसकी पिटाई कर दी। इससे उसकी मौत हो गई। पिटाई के बाद उनलोगों ने कहा कि वह बेहोश हो गई है और उसे अस्पताल ले जा रहे हैं, लेकिन वे जिस तरह से नेहा को ऑटो में लेकर गए उससे लगा कि उसकी मौत हो चुकी है। मैंने कई बार ऑटो में चढ़ने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने साथ नहीं जाने दिया। अगले दिन नेहा का शव गंडक नदी पर बने पटनवा पुल का पास मिला।

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