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कोरोना वैक्सीन की सप्लाई पर सरकार का फोकस, हर महीने 35 से 36 करोड़ टीके होंगे उपलब्ध, कमीं हुई तो होंगे ये विकल्प

By: RNI Hindi Desk 
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कोरोना वैक्सीन की सप्लाई पर सरकार का फोकस, हर महीने 35 से 36 करोड़ टीके होंगे उपलब्ध, कमीं हुई तो होंगे ये विकल्प

रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नई दिल्ली: देश में लगातार कहर बरपा रहे कोरोना महामारी को देखते हुए मोदी सरकार ने एक मई से 18 साल से अधिक आयु के लोगो को भी टीका लगाने की अनुमति दे दी है। वहीं दूसरी तरफ सरकार टीके की पर्याप्त आपूर्ति के भी प्रयास तेज कर दिए हैं। इन सबके बीच सरकारी सूत्रों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में टीके की उपलब्धता में अभी कम से कम छह महीने का वक्त लग सकता है। देश में सितंबर-अक्टूबर तक टीकों की प्रतिमाह 35 से 36 करोड़ खुराक उपलब्ध होने की उम्मीद है।

मौजूदा वक्त में उत्पादन की बात करें तो देश में सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक कोविड-19 का टीका बना रहे हैं। सीरम इंस्टीट्यूट की बात करें तो अभी हर महिने छह से सात करोड़ टीके का उत्पादन कर रहा है,  वहीं भारत बायोटेक 90 लाख से एक करोड़ वैक्सीन बना रहा है। दोनों सस्थाओं को मिलाकर देश में फिलहाल टीके की अधिकतम उपलब्धता आठ करोड़ प्रति महीने है। इस उत्पादन क्षमता में प्रतिदिन 25-30 लाख टीके ही लग सकते हैं।

टीको को लेकर सरकार की रणनीति की बात करें तो देशी टीके ‘कोवैक्सीन’ का उत्पादन बढ़ाने पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है। जुलाई तक कोवैक्सीन का उत्पादन छह से सात करोड़ खुराक प्रतिमाह की तैयारी चल रही है। इसी के साथ भारत बायोटेक हैदराबाद यूनिट में अपनी क्षमता में इजाफा करने की कोशिशों में जुटी है। जबकि  बेंगलुरु में भी नया उत्पादन शुरू किया जा रहा है। कंपनी ने मंगलवार को बताया कि वह सालाना 70 करोड़ कोविड टीके के उत्पादन की क्षमता विकसित कर रही है।

आपको बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘कोवैक्सीन’ के उत्पादन की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की दो कंपनियों-बिबकोल (बुलंदशहर) और आईआईएल (बेंगलुरु) को सौंपी है। छह महीने के भीतर ये कंपनियां डेढ़-डेढ़ करोड़ खुराक तैयार करने लगेंगी। इसी के साथ  महाराष्ट्र सरकार की यूनिट ‘हाफकिन इंस्टीट्यूट’ छह महीने के भीतर ‘कोवैक्सीन’ की दो करोड़ खुराक तैयार करेगी।

केंद्र सरकार के आग्रह पर पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया अगले तीन से चार महीनों में ‘कोविशील्ड’ टीके की अपनी उत्पादन क्षमता को 11 करोड़ खुराक प्रति माह करने को तैयार है। हालांकि, इसके लिए इंस्टीट्यूट ने सरकार से 3000 करोड़ रुपये की मांग की है, जो उसे टीके की खरीद के लिए पेशगी के रूप में दिए जा सकते हैं।

महामारी की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप और जापान में स्वीकृत तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की सूची में शामिल टीकों को भी देश में आपात इस्तेमाल की मंजूरी देने का फैसला किया है। संभावना है कि आने वाले कुछ ही महीनों में  फाइजर, मॉर्डना, जॉनसन एंड जॉनसन समेत कई कंपनियां अपना टीका भारतीय बाजार में उतार सकती हैं।

सरकार के इतने इतंजाम के बाद भी अगर देश में टीके की कमीं महसूस होती है तो वह कई और सरकारी या निजी दवा कंपनियों को ‘कोवैक्सीन’ के उत्पादन का लाइसेंस जारी कर सकती है।

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