भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत-2047 विजन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने बीते दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण, बाल संरक्षण और पोषण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। प्रदेश में Women Led Development की अवधारणा को जमीनी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
प्रदेश में संचालित 57 वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए सबसे बड़ी सहायक सुविधा बनकर उभरे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं, चिकित्सकीय परामर्श, विधिक सहायता और पुलिस सहयोग एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में 5 नए वन स्टॉप सेंटर शुरू किए गए हैं और 54,627 से अधिक संकटग्रस्त महिलाओं को लाभ मिला है। वहीं महिला हेल्पलाइन 181 के जरिए बीते दो वर्षों में लगभग 2,36,723 महिलाओं को त्वरित सहायता प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई है। जून 2023 से दिसंबर 2025 तक योजना की 31 किस्तों का भुगतान किया गया। अब तक 1 करोड़ 26 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में ₹88,632 करोड़ से ज्यादा की राशि सीधे अंतरित की जा चुकी है। मंत्री ने बताया कि यह मॉडल देशभर में सराहा जा रहा है और कई राज्यों ने इसे अपनाया है।
मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत प्रदेश में अब तक 52 लाख से अधिक बालिकाओं का पंजीयन हो चुका है। पिछले दो वर्षों में 6.40 लाख बालिकाओं को ₹350 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन राशि दी गई है।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए कई पहल की गईं। पिंक ड्राइविंग लाइसेंस अभियान के तहत 6,134 महिलाओं/बालिकाओं को लर्निंग लाइसेंस मिले। समाज में प्रेरणा के लिए 1,794 जेंडर चैंपियन चिन्हित किए गए हैं। सशक्त वाहिनी कार्यक्रम से 7,000+ बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कराई गई। आगामी तीन वर्षों में शाला-त्यागी बालिकाओं को मुक्त स्कूल बोर्ड के माध्यम से 10वीं-12वीं की परीक्षा दिलाकर मुख्यधारा में लाने और अन्य के लिए कौशल प्रशिक्षण की योजना है।
कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा व सुविधा के लिए पहली बार ₹284 करोड़ की लागत से 8 वर्किंग वूमन हॉस्टल (कुल 5,121 सीटें) बनाए जा रहे हैं, जो अगले तीन वर्षों में पूरी तरह संचालित होंगे।
समन्वित प्रयासों से बाल विवाह में उल्लेखनीय कमी आई है- NFHS-4 (32.4%) से घटकर NFHS-5 (23.1%)। कुपोषण के खिलाफ अभियानों से कम वजन, ठिगनापन, दुबलापन और गंभीर कुपोषण-सभी संकेतकों में सुधार दर्ज हुआ है।
आंगनवाड़ी सेवाओं में संपर्क ऐप, पोषण ट्रैकर और फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम जैसे डिजिटल नवाचार लागू किए गए हैं। इनसे सेवाओं की निगरानी और पारदर्शिता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि कोई भी महिला या बच्चा विकास से वंचित न रहे। महिला सशक्तिकरण, सुरक्षित बचपन और सुपोषण के जरिए मध्यप्रदेश विकसित भारत-2047 में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।