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गेहूं उपार्जन में किसानों को नहीं होनी चाहिए कोई परेशानी : CM डॉ. मोहन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्था, समय पर भुगतान और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

By: Abhinav Tiwari 
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गेहूं उपार्जन में किसानों को नहीं होनी चाहिए कोई परेशानी : CM डॉ. मोहन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गेहूं उपार्जन प्रक्रिया के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि पंजीकृत किसानों के सत्यापन, उपार्जन केंद्रों पर बारदानों की उपलब्धता और किसानों को समय पर भुगतान की व्यवस्था पूरी तरह सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में गेहूं उपार्जन का कार्य इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 16 मार्च से 5 मई तक किया जाएगा, जबकि जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, शहडोल, चंबल और सागर संभाग में 23 मार्च से 12 मई तक उपार्जन होगा। किसानों के पंजीयन की अंतिम तिथि 7 मार्च निर्धारित की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित राज्य स्तरीय बैठक के बाद जिला कलेक्टरों से वर्चुअल संवाद के दौरान दिए।

उपार्जन केंद्रों पर सभी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्रों का समय पर निर्धारण और स्थापना सुनिश्चित की जाए तथा इन केंद्रों पर किसानों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि उपार्जन कार्य में लगे कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाए और जिला उपार्जन समिति नियमित बैठकें कर समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करे। साथ ही किसानों को अद्यतन जानकारी सरल तरीके से उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

खाड़ी देशों में रह रहे लोगों और उनके परिवारों से रखें संपर्क

मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि खाड़ी देशों में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए वहां रह रहे प्रदेश के नागरिकों और विद्यार्थियों के परिवारों से निरंतर संपर्क बनाए रखें। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली और वल्लभ भवन मंत्रालय में सहायता के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। जिला स्तर पर भी ऐसे परिवारों के साथ समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

भ्रामक सूचनाओं का तुरंत किया जाए खंडन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन और प्रशासन से जुड़ी भ्रामक या मिथ्या सूचनाओं का जिला स्तर पर तुरंत प्रभावी खंडन किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया के दौर में गलत सूचनाओं का तेजी से फैलना एक चुनौती है, इसलिए प्रशासन को तुरंत सही जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए।

शैक्षणिक संस्थानों और छात्रावासों का करें आकस्मिक निरीक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में स्कूलों और कॉलेजों में परीक्षाओं का दौर चल रहा है, इसलिए जिला अधिकारी शैक्षणिक संस्थानों, छात्रावासों और विश्वविद्यालय परिसरों का आकस्मिक निरीक्षण करें। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि परीक्षाएं और आगामी सत्र की तैयारियां सुचारू रूप से संचालित हों।

कार्यालयीन समय का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यालयीन समय का सख्ती से पालन करने की अपेक्षा जताई। उन्होंने बताया कि हाल ही में मंत्रालय में आकस्मिक निरीक्षण के माध्यम से कार्यालयीन समय के पालन की जांच की गई थी। इसी तरह जिला स्तर पर भी कलेक्टरों को निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को दी गई सुविधाएं उनका अधिकार हैं, लेकिन इसके साथ उनसे नियमानुसार कार्य लेना भी आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कार्यालयीन समय के पालन में सुधार नहीं हुआ तो राज्य में छह कार्यदिवसीय सप्ताह लागू करने पर भी विचार किया जा सकता है।

किसान कल्याण वर्ष के तहत होंगे विशेष कार्यक्रम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। जिलों में आयोजित पारंपरिक मेलों में कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में नवाचार करने वाले किसानों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके साथ ही जिला कलेक्टरों को स्थानीय स्तर पर होम-स्टे को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सके। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अशोक बर्णवाल, संजय दुबे, नीरज मंडलोई, दीपाली रस्तोगी और शिवशेखर शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस बैठक में प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

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