रिपोर्ट: सत्यम दुबे
रायपुर: कोरोना महामारी के दूसरे लहर का कहर लगातार जारी है। कोरोना से संक्रमित मरीज ऑक्सीजन और दवाईयों की कमीं से लगातार दम तोड़ रहें हैं। महामारी के दूसरे लहर ने कई हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर दिया है। मौजूदा वक्त में कोरोना महामारी ने देश को अपने चपेट में ले लिया है। इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में एक नर्स अपने पति और सास को कोरोना महामारी में ही खो कर, लोगों की जिंदगियां बचाने में लगी हुई हैं। महिला के इस हौंसले के RNI न्यूज सलाम करता है।
आपको बता दें कि बहादुरी का यह मामला राज्य के बलोदा बाजार से आया है, जहां एक नर्स ने अपने पति और सास को गंवाने के बावजूद खुद को टूटने नहीं दिया और पूरे समर्पण से काम में जुटी रहीं। नर्स की कहानी सुनकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी भावुक हो उठे।
महामारी का कहर छत्तीसगढ़ में बरपा है, वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हाल ही में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के मौके पर ऑनलाइन आयोजित एक कार्यक्रम में नर्सों के साथ बातचीत कर रहे थे। इसमें उन्होंने कोरोनाकाल में भी पूरी हिम्मत से काम पर लगे रहने के लिए नर्सों को सलाम किया। इसी बातचीत के दौरान जब नर्स वर्षा गोडाने की बारी आई, तो उन्होंने बताया कि कैसे कोरोना की वजह से उन्होंने अपने पति और सास को खो दिया। इसके बावजूद वे ड्यूटी पर जुटी रहीं। वर्षा ने बताया कि उनके बच्चे भी कोरोना से संक्रमित हो गए थे, लेकिन वे ठीक हो गए और इसके बाद फिर ड्यूटी जॉइन कर ली।
नर्स वर्षा गोड़ाने की बात सुनकर सीएम बघेल अपने आंसू नहीं रोक पाए। उन्होंने कहा कि आपने अपने दायित्व को पूरा किया, इसकी जितनी भी तारीफ की जाए, वह कम है। बघेल इसके बाद पास रखे रुमाल से आंसू पोछने लगे। सीएम ने आगे कहा, “सभी नर्सों को मैं नमस्कार करता हूं। आप विकृत परिस्थिति में काम कर रही हैं और उनके परिवार प्रभावित होने और खोने के बावजूद भी जो सेवाएं आपने दी हैं, वह उत्कृष्ट सेवा के दायरे में आता है।” सीएम ने नर्सों की सेवा की भावना को सलाम करते हुए उन्हें देवी का रूप तक कह दिया।
इन्ही डॉक्टरों और नर्सों के हौंसले के बलबुते छत्तीसगढ़ में कोरोना का ग्राफ नीचे गिरा है। पिछले 24 घंटों में 6477 नए मामले सामने आये है। इसके साथ ही राज्य में इस वायरस से संक्रमित हुए लोगों की कुल संख्या बढ़कर 9,25,531 हो गई है। जबकि पिछले 24 घंटे में 153 मरीजों ने अपनी जान गंवा दी है। इसके साथ ही 12 हजार से ज्यादा लोग महामारी को मात देकर घर जा चुके हैं।