टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थानांतरण रुकवाने के लिए प्रभारी मंत्री के नाम से कथित तौर पर फर्जी पत्र तैयार कर प्रस्तुत करने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पत्र के वास्तविक नहीं होने की पुष्टि होने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर दिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ एमपीडब्ल्यू केएल बंशकार का स्थानांतरण स्वास्थ्य केंद्र गोर से दरगाएं किया गया था। आरोप है कि स्थानांतरण निरस्त कराने के उद्देश्य से प्रभारी मंत्री के नाम से एक पत्र तैयार कर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बताया जा रहा है कि पत्र में स्थानांतरण आदेश निरस्त करने का उल्लेख किया गया था।
स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने पत्र के आधार पर नोटशीट तैयार कर उसे कलेक्टर विवेक श्रोतिय के पास भेजा। दस्तावेज की जांच के दौरान कलेक्टर को पत्र में प्रभारी मंत्री के नाम में त्रुटि दिखाई दी, जिसके बाद पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए। जांच में सामने आया कि पत्र आधिकारिक नहीं था और इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कथित तौर पर फर्जी पत्र तैयार करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग किए जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इसकी पुष्टि पुलिस जांच और तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन अब यह भी पता लगा रहा है कि इस कथित फर्जीवाड़े में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी या नहीं।

मामले को गंभीर मानते हुए कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने संबंधित कर्मचारी के निलंबन के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जांच कराने को कहा गया है। पुलिस अब यह जांच करेगी कि कथित फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार किया गया, इसमें तकनीक का क्या इस्तेमाल हुआ और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।
इस घटना के बाद सरकारी पत्राचार और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।