रिपोर्ट- पल्लवी त्रिपाठी
पूर्णिमा का व्रत तो हर महीने आता है, लेकिन सनातन धर्म में चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को चैत्र पूर्णिमा कहते हैं। चैत्र हिंदी वर्ष का प्रथम मास होता है इसलिए इसे प्रथम चंद्रमास भी कहा जाता है। चैत्र पूर्णिमा को भाग्यशाली पूर्णिमा भी माना गया है।
कहते हैं इस दिन व्रत रखने से ईश्वर की अपार कृपा बरसती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस दिन विशेष रूप से सत्यनारायण भगवान की पूजा जाती है। लेकिन इस दिन कुछ चीजों का आपको विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। अन्यथा यह व्रत फलित नहीं होता है और इसका बुरा असर भी पड़ सकता है।
1.चैत्र पूर्णिमा के दिन गरीब जरूरतमंदों को दान करना न भूलें। ऐसा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, पापों का नाश होता है।
2.पूर्णिमा समेत किसी भी व्रत या पूजा में काले वस्त्र धारण करना वर्जित है।
3.पूर्णिमा पर व्रत रखने वालों को फलाहार करना चाहिए, जबकि घर वालों को भी मांस-मदिरा लेने से परहेज करना चाहिए।
4.पूर्णिमा के दिन देर तक न सोएं, ऐसा करना इस दिन वर्जित माना गया है।
5.माघ पूर्णिमा के दिन घर और आसपास की सफाई करना न भूलें। गंदगी से घर में नकारात्मक ऊर्जा आती है।
6.माघ पूर्णिमा के दिन संभोग क्रिया से बचें। ऐसा करने से जीवन में कष्ट बढ़ सकते हैं।
7.इस दिन बाल काटना, नाखून काटना या शेविंग आदि भूल से भी न करें।
8.पूर्णिमा के दिन बुजुर्गों का अपमान कतई ना करें। ऐसा करते हैं तो पितरों के क्रोध का सामना करना पड़ेगा।
9.इस दिन किसी प्रकार का कलह न करें, अन्यथा घर की सुख-शांति हमेशा के लिए चली जाएगी।
10.पूर्णिमा के दिन किसी की निंदा करने से बचें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाएंगी।
पूर्णिमा के दिन ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा…
पुराणों के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा पर विधि-विधान से पूजा करने पर श्री हरि विष्णु की विशेष कृपा बरसती है। भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय है, इसलिए इस दिन प्रसाद में तुलसी के पत्ते जरूर रखें। इस दिन आप तुलसी स्नान करके मां लक्ष्मी की विशेष कृपा पा सकते हैं। पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके व्रत का संकल्प करें। श्री हरि की फोटो या मूर्ति पर जल, फूल अर्पित करें और चंदन लगाएं। प्रसाद में आटे की पंजीरी व पंचगव्य से पंचामृत बनाए। फल में केला जरूर चढ़ाए। पीले वस्त्र भी चढ़ा सकते हैं। जिसकू बाद व्रत कथा करें और भगवान विष्णु की आरती करें। पूजा संपन्न करने के बाद प्रसाद सभी में बांटे।
इस दिन माता लक्ष्मी की भी उपासना करनी चाहिए। इसके लिए आप कनकधारा स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं। साथ ही अन्न से भरे घड़े को किसी ब्राह्मण या फिर किसी गरीब व्यक्ति को दान करें।
माना जाता है कि इस दिन पूजा करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है और भक्त के हर कष्ट दूर होते हैं। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। दान करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति भी होती है।