दीपावली को दीप उत्सव भी कहा जाता है। क्योंकि दीपावली का मतलब होता है दीपों की अवली यानि पंक्ति। दिवाली या दीपावली हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है। हिंदू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है। धनतेरस से भाई दूज तक करीब 5 दिनों तक चलने वाला दिवाली का पर्व भारत और नेपाल समेत दुनिया के कई देशों में मनाया जाता है।
दिवाली का पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध, जैन और सिख धर्म के अनुयायी भी दिवाली मनाते हैं। जैन धर्म में दिवाली को भगवान महावीर के मोक्ष दिवस के रूप में मनाया जाता है। वहीं सिख समुदाय में इसे बंदी छोड़ दिवस के तौर पर मनाते हैं।

दिवाली के दिन भूलकर न करें ये काम-
दिवाली की रात महालक्ष्मी गृहस्थ के घर में विचरण करती हैं। मां लक्ष्मी क स्वच्छता बेहद पसंद है ऐसे में इस घर हो या दुकान एकदम साफ-सुथरा होना चाहिए। दिवाली को रोशनी का महापर्व भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन श्री राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या वापस आए थे। दिवाली के दिन कुछ बातों का खास ख्याल रखा जाता है। अगर इन बातों का ख्याल न रखा जाए तो कहा जाता है कि इससे मां लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। आइए जानते हैं कि दिवाली पर किन बातों का ख्याल रखना जरूरी होता है।

दिवाली पर ये करें:
इस दिन सुबह सभी कार्यों से निवृत्त हो जाएं और साफ कपड़ें पहन लें। फिर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
घर क साफ करें और घर के दरवाजे पर आम, अशोक व केले के पत्तों से तोरण सजाएं।
मां भगवती के लिए खीर बनाएं और उसका भोग लगाएं।
इस दिन किसी से झगड़ा न करें। इस दिन बुजुर्गों का आशीर्वाद जरूर लें।
रात्रि जागरण करें क्योंकि इस दिन मां लक्ष्मी घरों में विचरण करती हैं।
घर के दरवाजे पर अगर कोई भिक्षुक आता है तो उसे खाली हाथ न भेजें।
घर के मुख्य दरवाजे पर शुभ-लाभ, श्री, स्वस्तिक और ओम के शुभ चिन्ह सिंदूर से बनाएं।
लक्ष्मी जी के साथ-साथ नारायण की भी पूजा करें। मां लक्ष्मी को सुहाग का सामान चढ़ाएं।
इस दिन पितरों की शांत के लिए पश्चिम दिशा में 14 दीपक जौ के आटे के बनाकर रख दें।
इस दिन किसी गरीब को 9 किलो गेहूं का दान करें।
मां लक्ष्मी के प्रिय एरावत हाथी के लिए पूजा में 3 गांठ का गन्ना रखें। इससे आर्थिक, बुद्धि व पुण्य का लाभ होता है।
इस दिन नशा नहीं करना चाहिए। साथ ही जुआ भी नहीं खेलना चाहिए।
दिवाली के दिन क्रोध करें। क्लेश से बचें।
इस दिन देर तक न सोएं।
अपवित्र होकर रसोई में खाना न बनाएं।
प्रदोष काल में झाड़ू न लगाएं।
दीवाली पूजन स्थिर लग्न वृष व सिंह में ही करना चाहिए
14 नवम्बर सायंकाल 05 बजकर 30 मिनट से सायंकाल 07 बजकर 22 मिनट तक. प्रदोष काल 14 नवंबर को सायंकाल 05:32 से रात्रि 08:33 तक रहेगा।
वृष लग्न बहुत ही शुभ है। वृषभ काल 14 नवम्बर को सायंकाल05:29 से रात्रि 07:23 तक है. सिंह लग्न रात्रि 12 से रात्रि 032 बजकर 20 मिनट तक है.
व्यापारिक प्रतिष्ठान, शोरूम, दुकान, गद्दी की पूजा, कुर्सी की पूजा, गल्ले की पूजा, तुला पूजा, मशीन-कंप्यूटर, कलम-दवात आदि की पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त अभिजित दोपहर 12 बजकर 09 मिनट से आरंभ हो जाएगा। इसी के मध्य क्रमशः चर, लाभ और अमृत की चौघडियां भी विद्यमान रहेंगी जो शायं 04 बजकर 05 मिनट तक रहेंगी। गुरु का धनु में होना भी एक चमत्कार होगा। यह दीपावली देश के लिए बहुत ही मंगलकारी है।