बुरहानपुर जिले में पांगरी बांध परियोजना से प्रभावित किसानों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। परियोजना के कारण तीन गांवों की लगभग 287 हेक्टेयर कृषि भूमि डूब क्षेत्र में आ रही है, जिससे प्रभावित किसान पिछले तीन वर्षों से लगातार संघर्षरत हैं। सोमवार को ये किसान बुरहानपुर पहुंचे और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि उचित मुआवजा नहीं मिला तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
प्रेस वार्ता के दौरान किसान नेता डॉ. रवि कुमार पटेल ने बताया कि पांगरी बांध से जिन किसानों की भूमि डूब में जा रही है, वह उनकी आजीविका का एकमात्र स्रोत है। सरकार बार-बार आश्वासन देती रही, लेकिन आज तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
उन्होंने कहा- “सरकार तीन साल से बैठकें और वादे कर रही है, परंतु जमीन पर समाधान शून्य है। किसान लगातार अधिकारियों से लेकर मंत्री तक गुहार लगा चुके हैं। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से भी मुलाकात हुई थी, लेकिन परिणाम सिर्फ आश्वासन ही रहा।”
किसान नेताओं ने बताया कि सरकार 15 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे का प्रस्ताव दे रही है, जिसे वे पूर्णत: अनुचित और कम बताते हैं। किसानों की मांग है कि मुआवजा 20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर दिया जाए।
डॉ. पटेल ने स्पष्ट किया- “हमारे क्षेत्र में जमीन की कीमत 15 लाख रुपये प्रति एकड़ तक है, ऐसे में प्रति हेक्टेयर 15 लाख देना किसानों का मज़ाक उड़ाने जैसा है। यह दर किसानों को बर्बाद करने वाली है, क्योंकि उनका संपूर्ण भविष्य इसी जमीन पर निर्भर है।” उन्होंने कहा कि इतना कम मुआवजा मिलने का अर्थ है कि किसान न नई जमीन खरीद पाएंगे और न ही अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकेंगे।
किसानों ने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत किसानों की बर्बादी बनकर नहीं आनी चाहिए। एक किसान ने भावुक होते हुए कहा- “हमारी जमीन चली जाएगी तो हम कहाँ जाएंगे? सरकार को समझना चाहिए कि जमीन ही किसान का जीवन है। उसे छीनकर बड़े प्रोजेक्ट के नाम पर हमें उजाड़ा नहीं जा सकता।”
प्रभावित किसानों ने स्पष्ट कहा कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे प्रदेश स्तर पर बड़ा और उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा- “अब सब्र का बाँध टूट चुका है। यदि सरकार ने न्याय नहीं किया तो आंदोलन की राह ही आखिरी विकल्प बचेगी।”