बुरहानपुर जिले के ग्राम पंचायत सोनूद में सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय के भवन लंबे समय से जर्जर हालत में बताए जा रहे हैं। इसका असर करीब 250 विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
स्कूल भवन की स्थिति खराब होने के कारण विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कक्ष उपलब्ध नहीं हैं। सीमित कमरों में बच्चों को बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, एक कमरे में 60 से अधिक बच्चों के बैठने की स्थिति बन रही है। इतनी संख्या में विद्यार्थियों के एक ही कक्ष में बैठने से न केवल बच्चों को असुविधा होती है, बल्कि शिक्षकों के लिए भी प्रभावी तरीके से पढ़ाना चुनौती बन जाता है।
विद्यालय की व्यवस्था से जुड़ा एक और मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि माध्यमिक विद्यालय के परिसर में मक्के की फसल उगाई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल की जमीन का इस्तेमाल खेती के लिए किया जा रहा है। लोगों का सवाल है कि जिस परिसर का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, खेल और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए होना चाहिए, वहां खेती किस आधार पर की जा रही है। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
विद्यालय के एक शिक्षक के अनुसार जर्जर भवन की समस्या को लेकर नए भवन के निर्माण के लिए कई बार आवेदन और मांग की जा चुकी है। इसके बावजूद अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन की स्थिति को लेकर पंचायत और प्रशासन को जानकारी दिए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने शिक्षा विभाग और जनप्रतिनिधियों से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है।
जर्जर भवन और सीमित कक्षों के बीच पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी ग्रामीण चिंतित हैं। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में शिक्षा मिलना जरूरी है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि स्कूल भवन की तकनीकी जांच कराकर आवश्यकतानुसार नया भवन बनाया जाए और तब तक विद्यार्थियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
सोनूद के स्कूल की स्थिति सरकारी स्तर पर शिक्षा सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों के सामने एक चुनौती के रूप में देखी जा रही है। करीब 250 बच्चों की शिक्षा प्रभावित होने की बात सामने आने के बाद अब निगाहें शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन पर हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि स्कूल भवन की समस्या और परिसर में खेती से जुड़े आरोपों की जांच कर जल्द आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि बच्चों को सुरक्षित माहौल में पढ़ाई की सुविधा मिल सके।