देश को खेल के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने के लिए सरकार ने जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को तलाशने और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने की रणनीति पर जोर दिया है। सरकार का लक्ष्य 2031 तक खेल व्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को मजबूत करना और 2047 तक भारत को ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना है।
खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए स्कूलों को अहम केंद्र बनाया जाएगा। शुरुआती स्तर पर ही खिलाड़ियों की क्षमता को पहचानकर उन्हें वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षण देने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। स्थानीय और नियमित प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
योजना में चिन्हित प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अलग-अलग खेलों और उनसे जुड़े विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षण और सुविधाओं की व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। सरकार के अनुसार खेल बजट में करीब आठ गुना वृद्धि और खिलाड़ियों के लिए अवसरों को लगभग दस गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार खेल सुविधाओं और प्रशिक्षण को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती। गांवों और वार्ड स्तर तक कोचिंग की व्यवस्था पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा, ताकि छोटे क्षेत्रों से निकलने वाली प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का मौका मिल सके। पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय स्तर पर मौजूद खेल प्रतिभाओं को पहचानने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
मंत्री ने मादक पदार्थों के खिलाफ चल रहे अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने में खेल प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। इसके लिए परिवार, अभिभावकों और समाज में खेलों के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
खेलों के विस्तार के लिए निजी संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने की योजना है। खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचानने और प्रशिक्षण को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का अधिक इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही जरूरत के अनुसार विदेशी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों की सेवाएं लेने का भी प्रावधान रहेगा।
प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने में आर्थिक बाधा न आए, इसके लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा। प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं और अन्य जरूरी जरूरतों में मदद देकर खिलाड़ियों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार की योजना स्कूल स्तर से शुरू होने वाली प्रतिभा खोज को गांव, वार्ड और अन्य जमीनी क्षेत्रों तक ले जाने की है। इसके जरिए भविष्य के लिए मजबूत खिलाड़ी तैयार करने और 2047 तक भारत को ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में पहुंचाने की दिशा में आधार तैयार किया जाएगा।