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आठनेर में भारी ओलावृष्टि से फसलें तबाह, किसानों पर टूटा कुदरत का कहर

अचानक बदले इस मौसम ने किसानों और आमजन को संभलने का कोई अवसर नहीं दिया और लोग बेबस होकर अपनी फसलें बर्बाद होते देखते रह गए। प्राकृतिक आपदा के बीच भ्रष्टाचार की तस्वीर भी उजागर हो गई है।

By: Naredra 
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आठनेर में भारी ओलावृष्टि से फसलें तबाह, किसानों पर टूटा कुदरत का कहर

बैतूलः मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के आठनेर तहसील क्षेत्र में अचानक मौसम ने विकराल रूप धारण कर लिया और कुदरत का कहर टूट पड़ा। तेज आंधी, तूफान और भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत को चंद मिनटों में बर्बाद कर दिया। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई, जबकि कट चुकी फसल बारिश में भीगकर पूरी तरह खराब हो गई, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

ओलों का आकार काफी बड़ा था, जिसके चलते सड़कों पर ऐसा दृश्य नजर आया मानो बर्फ की चादर बिछ गई हो। अचानक बदले इस मौसम ने किसानों और आमजन को संभलने का कोई अवसर नहीं दिया और लोग बेबस होकर अपनी फसलें बर्बाद होते देखते रह गए। प्राकृतिक आपदा के बीच भ्रष्टाचार की तस्वीर भी उजागर हो गई है।

हाल ही में लगाए गए एमपीईबी के बिजली पोल तेज हवा का दबाव तक सहन नहीं कर सके और कई स्थानों पर धराशायी हो गए। वहीं नगर परिषद आठनेर द्वारा बैतूल- आठनेर मार्ग पर डिवाइडर पर लगाए गए बिजली के खंभे भी जमीन पर गिर पड़े, जिससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

हालांकि उस समय बिजली आपूर्ति बंद थी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। लेकिन अब नगर में चर्चा तेज है कि इस आपदा के बाद फिर से मरम्मत के नाम पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और जिम्मेदारों पर कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।

बैतूल से संवाददाता कमलाकर तायवाड़े की रिपोर्ट

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