भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में छात्रों को लेकर कथित विवादित टिप्पणी का मामला अब भी राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस मामले में कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी छात्रों या आंदोलनकारियों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया।
भोपाल में मीडिया से चर्चा के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि वह कांग्रेस नेताओं से बातचीत करने और स्थिति समझाने के लिए गए थे। इसी दौरान हुई चर्चा के बाद उन पर छात्रों को लेकर विवादित टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया। उन्होंने कहा कि यह आरोप पूरी तरह गलत है और उनके बयान को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया गया है।
मंत्री विजयवर्गीय ने बताया कि कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने सदन में दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़े एक मामले का उल्लेख किया था। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर प्रदर्शन किया और उनसे माफी मांगने की मांग की।
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा में दोबारा आरोप लगाया कि उन्होंने छात्रों और आंदोलनकारियों के लिए आपत्तिजनक शब्द कहे हैं। उन्होंने इसे एक जनप्रतिनिधि के लिए गंभीर आरोप बताया। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने पूरी कार्यवाही की रिकॉर्डिंग की जांच कराई और स्पष्ट किया कि उनके द्वारा ऐसा कोई शब्द नहीं बोला गया था।

विजयवर्गीय ने कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष से न तो खेद की उम्मीद है और न ही माफी की आवश्यकता महसूस होती है। उन्होंने कहा कि उनका सवाल केवल इतना था कि क्या विधानसभा के रिकॉर्ड में कहीं यह दर्ज है कि उन्होंने छात्रों को लेकर ऐसा कोई शब्द कहा हो।
संसदीय कार्य मंत्री ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष की स्थिति स्पष्ट करने के बाद भी कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा और गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।